बेटी बिना अलोना घर है

बेटी बिना अलोना घर है


बेटी जहाँ प्यार पाती हैए वह घर स्वर्ग समान है!

बेटी बिना अलोना घर हैए या फीका पकवान है !



बेटी के हँसते ही खिलतेए जैसे चंदा तारे से

किलकारी से झरते लगतेए फूलों के मह्कारे से

अक्षतएचन्दन कुमकुमए बिंदिया बेटी की मुस्कान है!

बेटी जहाँ प्यार पाती हैए वह घर स्वर्ग समान है!



पौ फटते मीठे सपने सीए देहरी सजी रंगोली सी

अन्नपूर्णा सी वरदानीए गाय गोमती भोली सी

बजी शिवालय में ज्यों घंटीए मस्जीद उठी अजान हैं!

बेटी जहाँ प्यार पाती हैए वह घर स्वर्ग समान है !



दुलराती निज शिशु भैया कोए अपने अकं समेटती

राखी के कच्चे धागे मेंए पक्का नेह लपेटती

घर के कोनों में तितली सीए भरती मुक्त उड़ान है!

बेटी जहाँ प्यार पाती हैए वह घर स्वर्ग समान है!



बेटी सीता बेटी गीता ए बेटी राधा रानी है

बेटी सत की सावित्री हैए गंगाजी का पानी है

महारास क्रीडा में बेटीए मुरली सी मृदु तान है!

बेटी जहाँ प्यार पाती हैए वह घर स्वर्ग समान है!



घर आँगन की सोनजुही हैए सौरभ भर महकाती है

और पंख विकसित होते हीए चिड़िया सी उड़ जाती है

बेटी सदा पराया धन हैए नैहर में मेहमान है !

बेटी जहाँ प्यार पाती हैए वह घर स्वर्ग समान है !



बेटी जहाँ प्यार पाती हैए वह घर स्वर्ग समान है !

बेटी बिना अलोना घर हैए या फीका पकवान है !

किशोर पारीक श्किशोरश्

61ए माधव नगरए

दुर्गापुर रेलवे स्टेशन के सामनेए जयपुर दृ १

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