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Showing posts from March, 2019

’हे कृष्ण ! बचा लो नन्ही-नन्ही बच्चियों को !!’

’हे कृष्ण ! बचा लो नन्ही-नन्ही बच्चियों को!!’          हे कृष्ण! आज गिनती कर रही हूँ इस बर्बर होते, क्रूर समाज में उन दुष्कर्मी पापियों के हाथों मसल दी गई, नन्हीं-नन्हीं बच्चियों की, जिनके दूध के दाँत तक नहीं गिरे हैं, अभी जिनकी आवाज़ की तुतलाहट बरक़रार है, जिनकी मासूम आँखों ने अभी तक अपने भविष्य के लिए एक भी सुंदर सपना तक नहीं देखा। जिनके नन्हें पाँवों ने अभी देहरी के बाहर आसपास के तमाम रास्तों को जाना और पहचाना तक नहीं है। मगर दुर्भाग्य से एक दिन के लिए ही सही,वो जो अखबारों की सुर्खियां बन चुकी हैं व जिन हतभागिनियों का ताज़ा नाम शामिल हो चुका है दुष्कर्म पीड़िताओं में। वह पीड़िता जिसने अभी सुख को जाना था, ना किसी दुःख को, यक़ायक़ लहूलुहान कर दी गई है तन -मन, आत्मा से घायल कर दी गई हैं और तभी तो सर पटक पटक के रो रही हैं ’’उनकी जन्म दायिनी माँ, भीतर ही भीतर मर चुके है,ं हताश-उदास बाबुल। स्तब्ध हैं परिजन आसपास के लोग रिश्तेदार। पूरे एक दिन चर्चा में रहती है वह अखबारी सुर्ख़ियों में आई एक ‘‘दुष्कर्म पीड़िता’’ के नाम से। याद है मुझे इंदौर की वह 4 माह की दूध पीती बच्ची ,...

विशेष अभिनन्दन पत्र

1 ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर... श्रेष्ठ कहानीकार, संवेदनशील कवयित्री, ऊर्जावान बाल साहित्यकार एवं चंदन चर्चित व्यक्तित्व की स्वामिनी परम सम्माननीय डॉ. विमला भंडारी साहिबा.....                           ‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’ अभिनंदन पत्र दिनांक-27 मई 2018,उदयपुर आकर्षक व्यक्तित्व आपका, रहा कृतित्व महान।                                नवयुग के उजियारी वर्तिका सी, अनुपम है पहचान।। हे अक्षय कीर्ति की उज्ज्वल वर्तिका! आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की  एक विनम्र अभिव्यक्ति है। आपश्री ने राजस्थान के झीलों के शहर में पिता श्रीमान कृष्ण झंवर सा. के घर में एक फरवरी 1955  को ममतामयी मातुश्री श्...

आ गया है “मी टू “नाम का कृष्ण् का अवतार

सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ता हमारा  हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलसितां हमारा ।   ’भारत जैसे इस सांस्कृतिक आ आर्यवर्त में इन दिनों मीडिया के फलक पर “मी टू “नाम के कृष्ण् का एक डिजिटल अवतार आया है जिसकी बांसुरी के मद्धम स्वरों से ही इस सभ्य समाज में ऐसा तूफान आया है ,जिसे कुछ लोग बासी कढ़ी ने उबाल का नाम दे रहे हैं। रामायण में सीता के हरण और महाभारत में द्रोपदी के चीर हरण की नाजायज़ घटनाएं सिद्ध करती है कि उस सतयुग  में भी  प्रतिष्ठित राज घराने की स्त्रियां भी  सुरक्षित नहीं थीं। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम  की परछाई होने के और लक्ष्मण की लक्ष्मण रेखा खींच जाने के बावजूद  सीता का हरण हो चुका था और भरी सभा में पांच -पांच पांडव पतियों और सभी बड़े बुजुर्गों की मौजूदगी में दुर्योधन ने द्रौपदी का अपमान कर उसका चीर हरण किया। ख़ैर उस युग में तो भगवान राम और भगवान कृष्ण ने सीता और द्रौपदी को किसी तरह बचा ही लिया था । परंतु उस समय भी एक धोबी के कथन मात्र से बाद में भगवान श्री राम को गर्भवती माता सीता का त्याग करके अपने महल से वन जाने को कहना पड़ा था।  इस कल...