विशेष अभिनन्दन पत्र
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
श्रेष्ठ कहानीकार, संवेदनशील कवयित्री, ऊर्जावान बाल साहित्यकार एवं चंदन चर्चित व्यक्तित्व की स्वामिनी
परम सम्माननीय डॉ. विमला भंडारी साहिबा.....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018,उदयपुर
आकर्षक व्यक्तित्व आपका, रहा कृतित्व महान।
नवयुग के उजियारी वर्तिका सी, अनुपम है पहचान।।
हे अक्षय कीर्ति की उज्ज्वल वर्तिका!
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। आपश्री ने राजस्थान के झीलों के शहर में पिता श्रीमान कृष्ण झंवर सा. के घर में एक फरवरी 1955 को ममतामयी मातुश्री श्रीमती कंचन देवी श्री झंवर की पावन कुक्षि से जन्म लेकर अपनी ऊर्जावान व सृजनशील उत्कृष्ट जीवन शैली से आपने सभी को प्रभावित किया है और अपने शानदार व्यक्तित्व के द्वारा ‘‘कुलं पवित्रं, जननी कृतार्थं, वसुंधरा भाग्यवती च तेन’’की उस पवित्र उक्ति को सर्वार्थ चरितार्थ किया है।
हे श्रेष्ठ जनप्रतिनिधी!
राजस्थान में सलूंबर क्षेत्र की एक ओजस्वी, प्रखर वक्ता तथा बेदाग़ राजनीतिक नेतृत्व में दृढ़ता व विवेकपूर्ण निर्णय शैली के कारण आपका व्यक्तित्व सदैव उजला रहा है। सलूबंर जैसे पिछड़े आदिवासी बहुल क्षेत्र में आपने अपनी संवेदनशील दृष्टि से अनेक जन कल्याणकारी कार्यक्रमों व राजकीय कार्यक्रमों व योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाया है। इसीलिये आज भी आपको यहाँ का जनमानस एक श्रेष्ठ मानवीय विभूति के रूप में स्मरण करता है। अपने ज़िला परिषद की सदस्यता के कार्यकाल के दौरान, सहधर्मी रचनाकारों के प्रति सौम्य, मैत्रीपूर्ण, स्नेहिल एवं सदाशयता से परिपूर्ण आपके संवेदनशील व्यवहार में पर्याप्त कठोरता का मणिकांचन संयोग आप की कार्यशैली को विशिष्टता प्रदान करते हैं।
हे यशस्वी साहित्यसेविका!
आप जैसी विभूति के उज्ज्वल मुखारविंद से इतिहास का दर्पण निखरता रहता है। जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश, चंद्रमा की शीतलता एवं जल के रंग का अनुवाद संभव नहीं है, आज उसी प्रकार आपके यशस्वी ऊर्जावान मंगलकारी जीवन का गुणानुवाद करने में हमें शब्दों का नितांत दारिद्रय् अनुभव हो रहा है। विश्व के 111 हिन्दी लेखिकाओं में शामिल, आपश्री के लेखन व व्यक्तित्व पर डॉ. विमला भंडारी की रचनाधर्मिता’’ पुस्तक ( ले0 श्री दिनेश कुमार माली2015) लेखन आपश्री की लोकप्रियता दर्शाता है। आपश्री की 1000 से भी अधिक समसामयिक रचनाओं से आपने देश भर के सुधि पाठकों को प्रभावित किया है, वहीं संलूबर में ‘सलिला’ नामक साहित्यिक संस्था की स्थापना के साथ, अनेक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंचो पर सदा आपकी भावपूर्ण, सार्थक अमृत वाणी से सभी को प्रेरणा के अनेक जीवन मंत्र प्राप्त होते रहते हैं। बालकों व देश के नौनिहालों के प्रति एक उत्कृष्ट प्रेम व स्नेह के वशीभूत आपश्री ने सन् 2011 से लगातार सलूंबर जैसे छोटे कस्बे से बाल साहित्यकारों के विशाल राष्ट्रीय कुंभ के सफलतम आयोजनों से यह सिद्ध किया है कि एक दृढ़ संकल्प शक्ति के द्वारा ही आप बाल साहित्य की चेतना की कितनी समर्थ प्रहरी बन चुकी हैं। आपके हिन्दी व राजस्थानी भाषाओं में प्रकाशित समृद्ध साहित्य संसार में भाव पूर्ण कविताओं, कहानियों, नाटकों, में बड़ा आकर्षण है, सफ़रनामा सलिला का- नामक डॉक्यूमेंट्री के साथ आपश्री ने ‘सलूंबर का इतिहास’ नामक पुस्तक से, व ‘‘युगयुगीन सलूंबर’’ नामक डॉक्यूमेंट्री द्वारा संलूबर की धरा को विख्यात किया है। सृजन के लिये आपने 30 वर्षों में अनेक प्रान्तों की यात्रा कर साहित्यिक सम्मेलनों में ऊर्जा का संचार किया है। अपनी सृजनशक्ति के आधार पर आपश्री देश की लगभग अनेकानेका साहित्यिक संस्थाओें व अकादमियों से दो दर्जन से अधिक उच्च साहित्यिक पुरस्कार व सम्मान से विभूषित व निरन्तर कीर्ति के पंखो पर सवार हैं।
धन्य है आपकी लेखनी, आपकी मेधावी वाणी और आपका विलक्षण, प्रतिभावान व्यक्तित्व! आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं तनिमा साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे!
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
सरस काव्य कला कोविद, सुधि गीत रचयिता ,वाग्देवी के यशस्वी ,लाडले सुपुत्र एक चंदन चर्चित प्रज्ञा पुरुष
परम सम्माननीय कवि श्रीमान श्री गिरीश विद्रोही साहब....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’.....
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
’सलीबें लेकर अपनी ख़ुद चले हैं अपनी राहों में,
यही तो अच्छे लोगों की एक पहचान है जग में ’
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। अपने स्वतंत्रता सेनानी पिता पं श्रीमान रघुनाथ जी पालीवाल के घर एवं माता श्रीमती उमा देवी जी पालीवाल की पावन कुक्षि में दिनांक 27 अप्रैल 1954 को नाथद्वारा में जन्मे आप श्री हिंदी ,राजस्थानी व ब्रज भाषा में विगत 40 वर्षों से अनवरत सृजनशील रहे हैं। हमें गर्व है कि नाथद्वारा क्षेत्र में राजकीय शिक्षण क्षेत्र में एक श्रेष्ठ शिक्षक रहते हुए, देश के यशस्वी मूर्धन्य कवियों के साथ, अधिकांश प्रांतों में काव्यपाठ मंच संचालन करते हुए,,आप एक जीवंत अक्षर पुरुष की तरह वर्षों से साहित्य-सृजन की सरस अभिव्यक्ति में निमग्न हैं। हमें गर्व है कि विगत चार दशकों से, श्रृंगार, आध्यात्म, करुणा के संवेदनशील पर सवार आपश्री की अद्भुत, प्रांजल काव्य शैली में, ‘संवेदनात्मक युग चेतन बोध’ का, मंजुल मिश्रण सभी को आकर्षित कर रहा है। आज संपूर्ण काव्य जगत आपश्री को लोकमंगल और मानवता के उत्थान की एक, आग्रही उपकार की प्रतिमूर्ति के रूप में देखता है, यही आपकी लेखनी का सम्मान है। राष्ट्रीय वैचारिक चिंतन, लोक संस्कृति और भाषा के उन्नायक आपश्री शाश्वत जीवन मूल्यों के साथ व्याकरणिक हिंदी, राजस्थानी, ब्रज भाषा में उदार, गंभीर, मगर लालित्यपूर्ण काव्यपाठ और मंच संचालन के लिए एक उत्कृष्ट नाम हैं। एक घने वट वृक्ष की भांति वर्षों से आपने कई काव्य प्रसूनों को खिलने का वरदान प्रदान किया है। आपका मौलिक शब्द कौतुक और संवेदनाजन्य काव्य-संसार एक सुंदर जीवन यात्रा है जो नवीन पीढ़ियों के लिए उपयोगी और सामाजिक बोध की एक प्रेरक विरासत है। साहित्य मंडल-नाथद्वारा से ‘ब्रज भाषा भूषण’,‘मेवाड़ भूषण’, द्वारकेश राष्ट्रीय परिषद कांकरोली से ‘कवि घनश्याम प्यारे सम्मान’, शाहपुरा से ‘कवि मोहन मंडेला सम्मान’ इंदौर से ‘राष्ट्रीय एकता सम्मान’, दिल्ली से ‘अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सम्मान’ व ‘राष्ट्रीय कवि सम्मान’ आदि पुरस्कार और सम्मान की सुदीर्घ श्रृंखला आपके यशस्वी काव्य संसार के इंद्रधनुषी चितराम हैं। आप का यह चिंतन सब को प्रेरणा देता है...
‘‘हमने दुःख के महासिंधु से सुख का मोती बीना है और उदासी के पंजों से हँसने का सुख छीना है
मान और सम्मान हमें ये याद दिलाते है पल पल, भीतर भीतर मरना है पर बाहर बाहर जीना है। ’’
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे !
सूरज रोज संवारे दिन को, चाँद मधुर सपने ले आये,
हर पल समय दुलारे आपको, सदियों तक पहचान पायें।।
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
सुर कोकिला ,स्नेह- अनुराग की पावन मूर्ति, विदुषी शिक्षिका एवं संवेदनशील काव्य साधिका!
परम सम्माननीय श्रीमती प्रेमप्यारी भटनागर साहिबा.....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
तू है प्यार का साज इस नफरत की दुनिया में, गनीमत है तेरी आवाज इस नफ़रत की दुनिया में,
धड़कता है दिले-हिंदुस्तान आवाज में तेरी, निराला है तेरा अंदाज इस नफ़रत की दुनिया में !!
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी शहर के कुलीन एवं प्रतिष्ठित परिवार में पिता श्री राम नारायण जी भटनागर के घर एवं मातुश्री कृपाल देवी जी भटनागर की पावन किक्ष में 11 नवंबर 1940 को जन्मीं ’आपश्री ’का मेधवी, प्रतिभावान व काव्यमय सुरीला जीवन प्रेरणा का बैकुंठ है, जहाँ से प्रेरणाओं के अमित झरने छलकते हैं। हमें गर्व है कि स्वयं पर आश्वस्त ,श्रम करती आपश्री की हथेलियों ने 32 वर्षीय राजकीय शिक्षा क्षेत्र में प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त होकर विज्ञान की प्राध्यापिका रहते हुए, अपनी छात्राओं को उदारता से, ज्ञान का वह ख़ज़ाना दिया है कि आज भी यत्र-तत्र अनेक उच्च पदों पर आसीन होकर आप की छात्राएँ, आपके समक्ष एक कृतज्ञता के भाव से नतमस्तक व करबद्ध खड़ी होती है, यही आपकी वाणी, विद्वता, व्यवहार कुशलता एवं श्रेष्ठ व्यक्तित्व का सम्मान है।
‘‘असर लुभाने का कशिश आपके बयान में है, किसी की आँख में जादू आपकी ज़ुबान में है।’’
वर्षों से नगर की अभिव्यक्ति और नवकृति जैसी साहित्यिक संस्थाओं की उच्च पदाधिकारी रही हैं। उदयपुर शहर के महाराणा प्रताप‘‘वरिष्ठ नागरिक संस्थान,’’‘‘ महाराणा कुंभा वरिष्ठ नागरिक क्लब’’ और ‘‘वरिष्ठ नागरिक-मुस्कान क्लब’’ की सक्रिय ,कर्मठ सदस्य एवं पदाधिकारी आप श्री को शिक्षा साहित्य में समाज सुधार के कार्यों में ज़िला प्रशासन, शिक्षा विभाग सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग-उदयपुर, वरिष्ठ जन सम्मान, रोटरी क्लब सम्मान-शिक्षण क्षेत्र में ,रोटरी क्लब मीरां द्वारा वरिष्ठ महिला सम्मान, एसआईईआरटी-उदयपुर, ‘‘कला श्रृंखला-उदयपुर’’-’ग़ज़ल कोकिला, ऑल इंडिया मैजिक फैडरेशन कला श्रृंखला द्वारा व कवि शिरोमणि’ की उपाधि से विभूषित है।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
यह चिराग बे नज़र हैं, यह नज़र भी बेजुबां है,
अभी तुमसे मिलता-जुलता कोई दूसरा कहां है?
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
सुर कोकिला ,स्नेह- अनुराग की पावन मूर्ति, विदुषी शिक्षिका एवं संवेदनशील काव्य साधिका!
परम सम्माननीय पत्रकार, संपादक श्री हिम्मत सेठ साहब.....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
.‘‘मंज़िलों पर पहुँचना भी खड़े रहना भी, कितना मुश्किल है बड़े होकर बड़े रहना भी।
तेज़ आंधी में जलना अपने दम पर सदा, कितना मुश्किल है चिरागों का खड़े रहना भी।।’’
हे निर्भीक एवं निडर समाजचेत्ता पत्रकार!
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। उदयपुर में आप श्री का जन्म 31 दिसम्बर 1946 को एक कुलीन व प्रतिष्ठित परिवार में पिता श्री भूरी लाल जी सेठ व मातुश्री श्रीमती पान बाई जी की पावन कुक्षि में हुआ। आपश्री के जीवन में पत्रकारिता की गंगा, सत्य-चेतना की यमुना और निर्भिकता व हिम्मत की सरस्वती का ऐसा संगम हुआ है कि आपश्री ने हिम्मत से अपने निर्भीकता से पत्रकारिता करते हुए आजीवन अपनी बुनियादी नीतियों से कभी भी कोई समझौता नहीं किया व सामंतवादी, सांप्रदायिक ताकतों के ख़िलाफ़, समाजवादी दृष्टिकोण अपनाया और अपने आदर्श प्रख्यात समाजवादी प्रणेता राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों के चलते रहे। जाति प्रथा के विरोधी रहते हुए आपश्री का लक्ष्य समाज में व्याप्त बुराइयों एवं कुरीतियों को ख़त्म कर भ्रष्टाचार व नशाखोरी का नाश करने का रहा है।
आपश्री ने पॉलिटेक्निक कॉलेज से इन्जीनियरिंग को छोड़ समाजवादी आन्दोलन में स्वयं को जोड़ा एवं तभी हिन्दुस्तान जिंक से 6 साल के कार्यकाल में इंटक के श्रमिक विराधी कार्य के विरोध में सशक्त आवाज़ उठाई व अपनी नौकरी तक गंवा दी। ।1977 से ही आप जनता पार्टी के सक्रिय सदस्य रहे। धर्मांधता, भारत पाक एकता, जल, सूखा व विस्थापन, वैश्वीकरण, वैकल्पिक मीडिया, आमजन की पीड़ा, मीडिया मुस्लिम समाज में शिक्षा सुधारवादी दाऊदी बोहरा समाज के आंदोलन, उदयपुर मास्टर प्लान, ग्रामीण शिक्षा में बदलाव, पानी की आपूर्ति नगर में सुपर स्मेल्टर की स्थापना, आतंकवाद सांप्रदायिकता विरोधी सम्मेलन के जरिए आपश्री ने समता संदेश से समाज में जागृति के सुर यत्र-तत्र-सर्वत्र बिखेरे हैं। महावीर समता संदेश की अब तक की राष्ट्रीय समता लेखक सम्मेलनों की सुदीर्घ श्रृंखला में आपश्री अनेक राष्ट्रीय व सामजिक चेतना के मुद्धों को उठाने में सफल रहे हैं। वहीं विगत 4-5 वर्षों से अपने ही निवास पर जनजागृति के लिए पर्यावरण, शिक्षा, राजनीति, सांप्रदायिक सद्भाव के राष्ट्रीय व स्थानीय मुद्धों व अनेकानेक सामाजिक समस्याओं को लेकर प्रबुद्ध जनों की बैठक आयोजित कर अपनी विलक्षण चेतना का परिचय दे रहे हैं। आज समस्त पत्रकारिता जगत आपकी लेखनी के आगे नतमस्तक है।
‘‘राजस्थान भाईचारा सम्मान- जयपुर’,’ ‘‘हिंदी रत्न सम्मान-राष्ट्रीय हिंदी परिषद- उत्तर प्रदेश’’, ‘‘पत्रकारिता सम्मान-अखिल भारतीय भाषा विकास संगठन’’ एवं यू.एस.एम.पत्रिका-ग़ाज़ियाबाद हिंदी सेवा सम्मान’’, ‘‘राष्ट्रीय हिंदी अकादमी-रूपांबरा कोलकाता’’, पत्रकारिता व समाज सेवा हेतु अदबी संगम सम्मान’’ उदयपुर, आदि पुरस्कार और सम्मान की सुधीर्घ श्रृंखला आपके यशस्वी काव्य संसार के इंद्रधनुषी चितराम हैं।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...!
संवेदन शील, प्रखर कवि, मुखर वक्ता व श्रेष्ठ पत्रकार,
सम्माननीय कवि व पत्रकार डॉ. कुंजन आचार्य .....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
सत्य ही स्त्रोत सभी शब्दों का,पाई न सूखने ज्ञान -विवेक की धारा,
बातें सारी सोची-विचारी, सार्थक ,साहित्य पत्रकारिता से जीवन है उजियारा।।
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। 30 जून 1976 को श्री कृष्ण धाम सांवरिया जिया में पिता श्री अध्यापक एवं ज्योतिषी रमेश आचार्य के घर व मातुश्री श्रीमती रेणुका आचार्य जी की पावन किक्ष में जन्मे आपश्री ने सृजन की अभिलाषा में, हिंदी साहित्य और पत्रकारिता में अपनी छोटी सी उम्र में ही श्रेष्ठ पहचान बनाली है। पत्रकारिता की विश्वसनीयता के साथ नवीन आदर्शों और लक्ष्यों को लिए हुए भारतीय संस्कृतिजन्य वैचारिक और साहित्यिक प्रवृतियों की ओर अग्रसर आपका जीवन भविष्य के पत्रकारों के लिए एक उजली पगडंडी है। हिंदी साहित्य और पत्रकारिता में आपश्री ने प्रिंट मीडिया में जय राजस्थान मीडिया में कार्य करते हुए ही मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में सर्जनात्मक पत्रकारिता पर पीएचडी करते हुए आपने सृजन की अभिलाषा को नए आयाम दिए हैं। व्यावहारिकता के साथ सुनियोजित ढंग से आत्मविश्वास पूर्ण नज़रिए से आपश्री ने प्रिंट मीडिया में जय राजस्थान, प्रतिदिन दैनिक, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में राजस्थान, उत्तर प्रदेश उत्तराखंड जैसे मीडिया संस्थानों में संवाददाता से लेकर संपादक की भूमिका निभाई है। ईटावी-के हैदराबाद केंद्र से पत्रकारिता का अमिट व असीम अनुभव अर्जित करते हुए वर्तमान में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में ‘‘असिस्टेंट प्रोफेसर प्रभारी’’ के पद पर सुशोभित है है।
किसी भी राष्ट्र के विकास में पत्रकारिता एक अहम भूमिका निभाती है। वर्तमान सूचना प्रौद्योगिकी की नवीन आधुनिक युक में आपश्री अपने प्रबुद्ध, दूरदृष्टि पूर्ण निर्देशन में पत्रकारिता के अनेक जिज्ञासु विद्यार्थियों के लिए अनुसंधान एवं अध्यापन प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक दृश्य श्रव्य पत्रकारिता के क्षेत्र में अनंत अवसर प्रदान कर रहे हैं वह श्लाघनीय है। एक आतंकहीन, बलवान, न्याय संगत समृद्धिवान, लोकसंस्कारित समाज की रचना में आप श्री के लिए अपनी वाणी का महत्वपूर्ण स्थान है।
आपश्री की शताधिक कविताएँ व फीचर, शोध आलेख देश भर की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। केंद्रीय साहित्य अकादमी, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, तथा नेशनल बुक ट्रस्ट के विभिन्न प्रकल्पों में आप सदैव अग्रणी रहे हैं। अब तक आप ही के निर्देशन में चार शोधार्थियों की पीएचडी अवार्ड हुई है और चार वर्तमान में शोधरत भी हैं। आप का कविता संग्रह ‘‘एक टुकड़ा आसमान’’, ‘‘समाचार पत्रों में साहित्य( शोध-2013) कंटेंपरेरी मास मीडिया (रिसर्च 2016 )संवाद सेतु (माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 11व12 ं की अनिवार्य हिंदी की मीडिया शिक्षण पुस्तक में सदस्य लेखक-2107संचार का नया माध्यम वेब रेडियो-(2018) आपके प्रकाशित पुस्तकें आपके सशक्त विचारों का अतुलित संग्रह हैं।
‘‘इंपिटस संस्थान -उदयपुर का सम्मा- 1992’’, कविता और सर्जनात्मक लेखन के लिए महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन का महाराणा राजसिंह पुरस्कार-1995, राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार-1995, कविता संग्रह-एक आसमान को राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार,’’ सन 2000 साहित्य कला एवं संस्कृति संस्थान, महाराणा प्रताप हल्दीघाटी द्वारा साहित्य का गौरव सम्मान-2017, ‘‘लेक सिटी प्रेस क्लब-उदयपुर द्वारा वरिष्ठ पत्रकार सम्मान 2018’’ आदि पुरस्कार और सम्मान की सुधीर्घ श्रृंखला आपके यशस्वी काव्य संसार के इंद्रधनुषी चितराम हैं।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
हो चित्त जहां भय शून्य, माथ हो उन्नत, हो ज्ञान जहाँ पर मुक्त, उस जगह आप विचरें।
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
अदबी दुनिया में शीरीं ज़ुबान के युवा शायर, सुधि दोहा रचयिता,एक संजीदा व सलीक़ेदार इंजीनियर,
उर्दू शायरी व अदब के गुलशन के महकते गुलाब जनाब अनस ख़ान सा..
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
हददर्द है आप नेक हैं आप दयावान हैं बस आपकी दिलों में ये पहचान है!
हे शोहरतों की बुलन्द राहों के संजीदा मुसाफ़िर !
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। एक उजले ख़ानदान में सन् 1984 में वालिद जनाब आसिफ खान साहब के घर और और मोहतरमा रिहाना आसिफ की पाक कोख में जन्में आपश्री ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एम टैंक कर अपने यौवन काल में जिस तरह शायरी की ओर अपनी खि़दमतों को अंजाम दिया वह क़ाबिले तारीफ़ है। आपश्री ने सन्-2004 से अपने अल्फाज़ और कलम को तेजधार देते हुए, जिस क़दर अदबी दुनिया में अपनी असरदार और सलीकेदार जुबान में छंद, दोहे व अपनी शायरी से इस कम उम्र में ऊँचा नाम हासिल किया है, उस के लिये आपको दिली मुबारक़बाद! अब तक सामाजिक सरोकारों और दौरे हाज़िर पर देश व समाज को समेटते हुए 400 से अधिक दोहे लिख चुके आपश्री ने वैज्ञानिक विषयों पर भी क़लम चलाते हुए उर्दू में श्रेष्ठतम दोहे रचे हैं और अपनी अदबी ख़िदमात का परिचय कराते हुए देश के विविध काव्य मंचों पर अपने शायरी का रुतबा स्थापित किया है। हमें गर्व है कि आप अपनी प्रतिभा और मेधा का परिचय कराते हुए वर्तमान में आपश्री हरियाणा के गुरुग्राम शहर में अमेरिकन कंपनी हनीवेल के क्षेत्रीय प्रबंधक है और लगातार अदब की ख़िदमात में भी जुटे हुए हैं।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे। आपश्री ने सदा इस ख़याल को अपने दिल के पहलू में रक्खा है....
हयात ले के चलो, क़ायनात ले के चलो
चलो तो सारे जमाने को साथ ले के चलो
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
जुझारू पत्रकार, युवा कवि व शायर, लघु कथाकार व कहानी लेखक, संजीदा जनसंपर्क अधिकारी
प्रतिभाशाली कवि, पत्रकार श्री गौरीकान्त शर्मा साहब...
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
प्रख्यात कवि व चिन्तक लेखक पाब्लो नेरुदा की तर्ज पर आपश्री ने कहा कि....
‘‘सचमुच मैं हूँ साझीदार सिर्फ़ प्रकाश फैलाने का,
मैंने चाहा होना-सामान्य व्यक्ति की तरह,
संघर्ष में नहीं पाया मुझे अनुपस्थित कभी।’’
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। आठ फरवरी 1978 को उदयपुर के श्रीमान फतह लाल जी शर्मा सा. के घर श्रीमती गीता देवी शर्मा जी की पावन कुक्षि से जन्मे युवा कवि, गज़लकार, लघु कथाकार, कहानी लेखक एवं वर्तमान में राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग-उदयपुर में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में आपश्री ने, अपने संपूर्ण जीवन को उत्कृष्ट लेखनी की इंद्रधनुष विधाओं में स्वयं को स्थापित कर रखा है। इतनी अल्पायु में भी अपने पत्रकारिता के सुदीर्घ अनुभवों से आज जिस गुरूतर दायित्व की चुनौतियाँ जो, आपके साम्मुख उपस्थित हैं, उन्हें आपश्री उल्लसित एवं दायित्व पूर्ण होकर सँभाल रहें हैं यह सभी के लिये एक उत्तम आदर्श है। सुदर्शन सदृश्य काल चक्रों पर सवार गोलाकार समय सारथी का शाश्वत स्वभाव सतत् परिवर्तनशील होता है यह समय ही आपश्री के संघर्षमय जीवन का साक्षी रहा है
बी.एस.सी,एम.ए.,बी.एड. एम.बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त कर आपश्री ने राजकीय अध्यापक के रूप में अपना जीवन शुरु किया मगर आपको किसी गमले के पौधे सा नहीं किसी बरगद का सा अपना जीवन गढ़ना था, इसीलिये आप श्री ने मीडिया के दुनिया में क़दम रक्खा। एक जुझारू कर्मण्य और उदारमना, टीवी पत्रकार के रूप में हैदराबाद, जयपुर, बीकानेर व उदयपुर, कई शहरों,महानगरों में ईटीवी नेटवर्क में 8 वर्षों तक के रूप में अपनी सेवाएँ दी । देश भर में अनेक पत्र पत्रिकाओं में नियमित लेखन के साथ आपश्री ने आकाशवाणी व यूटृयब चैनलों पर अपनी सारस्वत काव्य धारा बहाई है। श्रीमन्! आपकी सोच एक दीपक भांति है जो कहता है कि...
मैं जलता रहूँ निरन्तर बस जलता रहूँ , कालिमा के गाल पर मैं लालिमा मलता रहूँ
वक्त़ के साथ चलते हुए, अपने परिवेश, समाज, संस्कृति में न्यायप्रियता, तार्किक एवं विश्लेषणात्मक बौद्धिक कौशल, विशिष्ठ अभिव्यक्ति, जन-जन से गहन सम्पर्क और किसी मुद्दे पर परत दर परत तक सूक्ष्मावलोकनोपरांत न्यायोचित तार्किक विवेचन करते हुए निर्भीक होकर श्रेष्ठ निर्णय देने जैसी कई विशिष्ठताएँ आपश्री जैसी बहुमुखी प्रतिभा के धनी को माता सरस्वती ने प्रदान की है। अपने व्यवहार कुशलता है विनय शीलता से यश कीर्ति के पंखो पर सवार रह आपश्री बचपन से ही संघर्षशील रहे। मगर आप श्री ने... अपना जमाना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल, हम वो नहीं कि जिन को जमाना बना गया! इस ‘‘शेर’’ की तर्ज पर अपनी हिम्मत, संकल्प शक्ति, अपनी प्रतिबद्धता व पक्के इरादे से आज वह मुकाम हासिल किया है जिसे पाने के लिए सैकड़ों लोग आज भी प्रतीक्षारत हैं। राजस्थान साहित्य अकादमी की संवालिका व सरस्वती सभा के युवा सदस्य के बतौर हाल ही में आपने राजस्थान साहित्य अकादमी भरा युवा लेखक सम्मेलन का सफल व सार्थक आयोजन किया व संपूर्ण राजस्थान के साहित्यकारों की प्रशंसा व सराहना हासिल की।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
जन मन रंजन करें वंदन, हम जनमंगल कर जाएँं,
आपका सारस्वत व्यक्तित्व, हम सुयश सुमंगल गाएँ
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
असीम प्रतिभापुंज, बुलन्द हौसले की जीवटधारी, युवा कवयित्री व श्रेष्ठ प्रेरणाशाली व्यक्तित्व
मेधावी शिक्षिका व प्रतिभाशाली कवयित्री डॉ. कृष्णा जाँगिड़...
‘‘के पाणि पल्लवों में सस्नेह अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है,
हवा की ओट भी ले कर चराग जलता है।
राजस्थान प्रदेश के हनुमानगढ़ ज़िले के छोटे से गाँव मेंएक साधारण कृषक परिवार में पिता श्री देवी लाल जी जाँगिड़ के घर व ममतामयी मातुश्री श्रीमती गुड्डी देवी जाँगिड़ की पावन कुक्षि में आप का जन्म किसी दैवीय उपकार व चमत्कार से कम सिद्ध नहीं हुआ है। एक तेजस्विनी की तरह ही बचपन से ही शिक्षा व साहित्य के प्रति अगाध लगन ने आज आपको आज उस ऊँचे मकाम पर पहुँचाया है। विगत दो वर्षां से राजकीय विद्यालय में राजस्थानी भाषा की प्रथम श्रेणी की व्याख्याता के रूप में पदस्थ आपने पूर्व में ही अपनी, मेहनत लगन व मेधा से यूजीसी नेट की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर अव्वल दर्जा हासिल किया जिस पर आपके गुरुओं, गाईड, माता पिता-परिजन सभी को बेहद नाज़ है। बहुत ही हर्ष व गर्व का विषय है कि आपने अपनी छोटी सी आयु में ही अपने गाँव जसाना (नोहर )में अनेकानेक बालिकाओं को विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के लिय प्रेरणा दी व तमाम विरोधों के बावजूद अपने लक्ष्य को पाने में सफल रहीं। जिसके लिये आप जैसे सुदक्ष, सुललित एवं प्रतिभाशाली मेधावी व्यक्तित्व को ग्राम पंचायत जसाना ने ‘‘गाँव की रोशनी’’ का खि़ताब दिया। आप अपने संपूर्ण क्षेत्र में इसीलिये आप इतनी लोकप्रिय हैं कि सर्वत्र जन जन आपसे आपकी प्रतिभा व आपकी ऊर्जावान जीवनशैली से परिचित है। अपने गाँव में आप प्रथम पीएचडी प्राप्त गौरवशाली वो विभूति हैं जिन्होंने प्र्र्रथम बार ‘‘राजस्थानी भाषा में महिला काव्य लेखन’’ विषय पर पीएचडी कर के डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। मरुधरा में साहित्य के कीर्ति शब्दों की संवेदनशील बांसुरी के आजीवन साधिका के रुप में, आपने जिस तरह हिन्दी व राजस्थानी साहित्य सागर को समृद्ध बनाया है, वह श्लाघनीय है। आपकी ‘‘छोरी री जात व टींबड़ली शीर्षक की काव्य श्रृंखला आपको एक चेतनाशी गंभीर संवेदनशील कवयित्री के रूप में स्थापित करती हैं। राजस्थानी भाषा की एक प्रथम श्रेणी की एक प्रखर राजकीय शिक्षिका के रूप में, मरूधरा राजस्थान की मीठी व मनभावन भाषा का ज्ञान के विस्तार हेत आज जिस गुरूतर दायित्व की चुनौतियाँ के साथ उन्हें आप उल्लसित एवं दायित्व पूर्ण होकर सँभाल रहीं हैं यह एक गौरव का विषय है। अद्भुत स्मरण शक्ति, न्यायप्रियता, तार्किक एवं विश्लेषणात्मक बौद्धिक कौशल, विशिष्ठ अभिव्यक्ति, संवेदनशील मगर निर्भीक होकर श्रेष्ठ निर्णय देने जैसी कई विशिष्ठताएँ आप जैसी बहुमुखी प्रतिभा के धनी को वीणापाणि माँ सरस्वती ने प्रदान की हैं। आपको अपनी योग्यता व प्रतिभा हेतु हनुमान गढ़ ज़िलाघीश द्वारा गएातंत्र दिवस सम्मान, उदयपुर मे माइ्र गुरुकुल व राजस्थान पत्रिका सम्मान, वूमेन ऑफ सबस्टेंस सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
मान मिले सम्मान मिले, खुशियों का वरदान मिले,
कदम-क़दम पर मिले सफलता, डगर-डगर उत्थान मिले।
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
संवेदनशील कवयित्री, ऊर्जावान लेखिका एवं चंदन चर्चित, सुन्दर व्यक्तित्व की स्वामिनी...
सम्माननीय रचनाकार श्रीमती मोनिका गौड़ साहिबा.....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018,उदयपुर
आकर्षक व्यक्तित्व आपका, रहा कृतित्व महान।
नवयुग के उजियारी वर्तिका सी, अनुपम है पहचान।।
हे अक्षय धवल कीर्ति की उज्ज्वल वर्तिका!
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। 12 अगस्त 1972 को बीकानेर-राजस्थान के श्रीमान जगदीश जी शर्मा सा. के घर श्रीमती कौशल्या देवी शर्मा जी की पावन कुक्षि से जन्मीं आपश्री ने स्नातक ’’गृहविज्ञान’’ करने के बाद राजस्थानी, समाजशास्त्र और हिन्दी साहित्य में स्नातकात्तर डिग्री व, राजस्थानी साहित्य में नेट उत्तीर्ण करने के साथ ही निरन्तर अपनी वैचारिक ऊर्जा से मेधावी सृजनशीलता का सारस्वत अनुष्ठान रचा है। हिंदी एवं राजस्थानी भाषा में सृजनात्मक शक्ति के साथ जीवन की कटु सच्चाईयों को उकेरता, कलात्मक प्रज्ञा, जुझारूपन, निडरता और स्पष्टवादिता का मिला-जुला, विशिष्ट लेखन आपश्री को एक असाधारण कवयित्री और लेखिका के रूप में प्रतिष्ठित करता है। ‘‘शब्दश्री साहित्य संस्थान’’ की संस्थापक व मानद अध्यक्ष के रूप में राजस्थानी भाषा साहित्य व संस्कृति अकादमी के साथ, बीकानेर ज़िले में प्रथम बार आपश्री ने राजस्थानी लेखिका सम्मेल’ 2013 का सफल आयोजन किया जो आज तक स्मरणीय है। एक मधुर व आकर्षक खिलखिलाहट के साथ, वर्तमान के मशीनों के शोर में, भावनाओं की कोमलता और मन की अंदरूनी रूमानियत को ज़िंदा रखने के लिए, शहर, समाज में साहित्यिक ऊर्जा और साहित्य गर्माहट के लिए आपश्री जिस रफ़्तार से अपनी उत्तम लेखनी व सहज ओजपूर्ण वाणी का सहारा ले रही हैं, वह सचमुच श्लाघनीय है। महिला वर्ग की घनीभूत पीड़ा को उजागर करती हुई, आपश्री अपनी रचनाओं में नन्ही ग्रामीण बालिकाओं और कामगार महिलाओं के दर्द को भी उजागर करती रहती हैं। अब तक आपश्री ने’’अपने आप से अपरिचित’’ शीर्षक से हिन्दी कविता संग्रह,’’हथेळी में चांद’’ शीर्षक से राजस्थानी कविता संग्रह-राजस्थानी भाषा साहित्य संस्कृत अकादमी बीकानेर से प्रकाशित, ’’हरी-हरी खुशबू और काली गौरेया’’ हिन्दी कविता संग्रह-राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर से प्रकाशित,‘‘इण स्हैर रा लोग’’ राजस्थानी अनुवादित कविता संग्रह प्रकाशित’’इस शहर के लोग’’ माणिक बच्छावत के कविता संग्रह का अनुवाद’’ उपरोक्त कृतियों के सृजन द्वारा अपनी उच्च कोटि की साहित्यिक प्रतिभा का परिचय दिया है। दूरदर्शन जयपुर व अन्य टीवी चैनल्स तथा आकाशवाणी बीकानेर केन्द्र से पिछले 16 वर्षों से लगातार, अपनी हिन्दी राजस्थानी भाषा की कविताओं, परिचर्चाओं, समसामयिक वार्ताओं के ज़रिये व एक ड्रामा आर्टिस्ट के रूप में श्रोताओं से जुड़ाव बनाये रखते हुए आप श्री ने शब्द व कविता को हथियार बनाकर अपने सृजन से सह सिद्ध कर दिखाया है कि आपश्री आशा और जिजीविषा की उदात्त साहित्य सृजिका व कवयित्री हैं। प्रदेश व प्रदेश के बाहर आगरा, मथुरा सहित कई स्थानों पर आयोजित कवि सम्मेलनों में 1992 से निरन्तर सहभागिता व रचना पाठ करते हुए आपश्री ने सदैव हिन्दी, राजस्थानी की पुस्तकों की समीक्षात्मक, आलोचनात्मक दीठ से, शब्दों और भावों को प्रगट किया और उन पर अनेक साहित्यिक मंचों पर पत्रवाचन द्वारा शब्दों से निरन्तर साक्षात्कार भी करतीं रहीं हैं। आपश्री का साहित्य के इतर इसरो अहमदाबाद सें ’’ग्रामसेट’’ के प्रशिक्षणोपरान्त बाल सुरक्षा व महिला सुरक्षा से जुड़े अनेक इवेन्ट्स में कार्य और लाईव टेलीकास्ट एचआईवी/एड्स के क्षेत्र में जन-जागृति व वैयक्तिक अवेयरनेस के प्रचार-प्रसार हेतु परामर्शदाता व रिप्रोडेक्टिव हेल्थ ट्रेनर के रूप में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़ाव रहा है। वहीं लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स, इंग्लैण्ड की शोधार्थी डॉ. डेबोरा स्मिथ के शोध में वर्ष 2000 से 2002 तक शोध सहायक एवं इन्टरप्रेटर के रूप में कार्य वर्ष 2003 से 2005 तक यूनिवर्सिटी ऑफ इलनॉय, अमेरिका की शोधार्थी प्रोफेसर डॉ. कैथलिन ओ’रिली के शोध सहायक के रूप में कार्यरत रहीं हैं।
सरला देवी स्मृति सम्मान 2017- बीकानेर,‘‘काव्यश्री सम्मान-राष्ट्रीय कवि संगम, राजस्थान-2017’’,‘‘कल्याण फाऊण्डेशन ट्रस्ट द्वारा महिला दिवस 2017 पर स्त्री सशक्तिकरण सम्मान,‘‘भाईचारा फाऊण्डेशन राजस्थान’’, चन्द्रवीणा साहित्य कुंज एवं पाक्षिक समाचार’’ के राजस्थान लेखिका सम्मेलन में सम्मान 2017- कोटा,’’‘‘नगर विकास न्यास-बीकानेर द्वारा 26 जनवरी 2017 को मैथलीशरण गुप्त साहित्य पुरस्कार’’,‘‘राष्ट्रीय कवि संगम के तत्वावधान में केशरदेव गिनीया देवी बजाज चैरिटेबल ट्रस्ट (शिलॉंग) एवम् नारायणी साहित्य अकादमी (असम) द्वारा साहित्य श्री सम्मान -2016,’’‘‘राजेश बच्छ ट्रस्ट द्वारा साहित्य श्री सम्मान’ 2016,’’‘‘कल्याण फाऊण्डेशन ट्रस्ट द्वारा महिला दिवस 2016 के अवसर पर सम्मानित’’,‘‘प्रथम नवीन अलंकरण 2016 से धरणीधर रंगमंच बीकानेर में सम्मानित’’‘‘मरूधरा साहित्य परिषद हनुमानगढ का 16वां कुंवर चंद्रसिंह बिरकाळी साहित्य सम्मान 2016’’,‘‘ज़िला प्रशासन द्वारा गणतंत्र दिवस पर श्रेष्ठ शिक्षक व साहित्यक अवदान हेतु सम्मानित, ’2015 स्वाधीनता दिवस पर जिला प्रशासन बीकानेर, द्वारा साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिये सम्मानित 2014, सलिला साहित्य संस्थान सलूम्बर, द्वारा सलिला साहित्य रत्न सम्मान-2014,‘‘सम्मान-2014, ‘‘‘बीकानेर नगर स्थापना दिवस पर बीकानेर गौरव सम्मान-2013,‘‘‘‘गणतंत्र दिवस पर नगर विकास न्यास बीकानेर द्वारा ’’हथेली में चांद’’ राजस्थानी काव्य संग्रह पर ’’पीथळ पुरस्कार-2013’’ व’’नानूराम संस्कृता स्मृति साहित्य सम्मान-2012’,’ ’’नगरश्री’’ चूरू द्वारा सम्मानित 2011 आदि पुरस्कार और सम्मान की सुदीर्घ श्रृंखला आपके यशस्वी काव्य संसार के इंद्रधनुषी चितराम हैं।
धन्य है आपकी लेखनी, आपकी मेधावी वाणी और आपका विलक्षण, प्रतिभावान व्यक्तित्व! आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं तनिमा साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे!
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
संवेदन शील, प्रज्ञावान लेखक, निर्भीक व विरले व्यक्तित्व
अद्भुत व्यंग्यकार व लेखक सम्माननीय डॉ. देवेन्द्र ‘इन्द्रेश साहब...
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
उदासियों और बेबसी के तम हमें कब तक छलेंगे?
आप जब मुस्कान के बन दीप हरदम जलेंगे
हे यशस्वी क़लम साधक व अक्षय मुस्कानों के पुंज!
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा कीएक विनम्र अभिव्यक्ति है। 13 अप्रैल1947 को उझानी-बंदायूँ(उप्र) में श्रीमान की पावन कुक्षि से जन्मीं आपश्री ने पं. श्री जयगोपाल जी शर्मा के घर व मातुश्री श्रीमती भगवान देवी शर्मा की पावन कुक्षि से जन्म ले कर हिंदी भाषा और साहित्य को समृद्ध बनाने में व्यंग्य की विधा को अपनाते हुए एक सृजन सुचिंतित परिपाटी विकसित की है।
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आपश्री ने अपनी अविरल योग्यता व मेधा से एम.ए.(हिन्दी, संस्कृत) के साथ ही बी.एड. तथा ‘‘राजस्थान का हिन्दी व्यंग्य लेखन,(गद्य संदर्भ) विषय पर शोध प्रबंध’’ कर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।‘‘ जिस के आगे समय भी खींसे निंपारता हो, जिसने समय का न तन पर न मन पर हावी होने दिया हो, जिसे देख कर मुस्कुराते पुष्प भी शरमाते हों, अधखिली कलियाँ जिस पर बलिहारी हों हर दम तरोताज़ा दिखने वाले, मधुर मुस्कान के धनी, आपश्री आनंद और उत्सव के नखशिख सज्जन व साहित्यिक विभ्ूति है। एक निजी विद्यालय में अध्यापक रहते हुए, उदयपुर शहर के सर्वश्रेष्ठ व्यंग्यकार के रूप में आपकी भूमिका मुख्य रूप से एक रसिक पंडित आस्वादक की स्थापित हो गई। ज्वलंत विषयों पर आपकी रसज्ञता, विलक्षणता आपके श्रेष्ठ व्यंग्य लेखों में झलका करती है, जो अपने सुधि पाठकों और श्रोताओं के होठों की मुस्कान की इंचों का बढ़ाने के साथ ही, ह््रदय वह मस्तिष्क में भी मुस्कान के पौधे खिलाने में सक्षम तथा समर्थ है। आपश्री के व्यंग्य संकलन -‘‘निन्दक नियरे राखिए .(1991)’’,‘‘अस्पताल की टांग..(1995),’’‘‘मेरा श्रद्धांजलि समारोह (2007),’’ सद्य प्रकाशित-‘‘.लोकतंत्र में हम खरबूजे (2018) साहित्य जगत में अपनी असरदार शैली के कारण बेहद चर्चित रहे है।
आपश्री उत्तम शिक्षक, चतुर अभ्यासी, वत्सल पुरुष व्यग्ंय साहित्य के उत्तुंग शिखर हैं। एक अद्भुत विरल, श्रेष्ठ व्यक्तित्व धारक, आपश्री अपनी सहज-सरलकर्मी उदार भाषा में स्थानीय ,राष्ट्रीय व वैश्विक मुद्दों पर लेखनी चलाकर ऐसे व्यंग्य लेख लिखते रहे हैं जिन्होंने भारतीय चेतना व चिंतन को गुदगुदाते हुए निखारा भी है। समसामयिक विषयों पर लिखे गये आपके व्यंग्य लेखों में आप की भाषा सरल व व्यंजक है मगर प्रभाव इतना कि कलेजे पर असर करती है और चिंतन पर मबूर करती है। हिंदी के व्यंग्य साहित्य के इस कालखंड में आपश्री जन आकांक्षा और जन संघर्षों की प्रतिबद्धता के कीर्तिवान व्यंग्यकार के रूप में स्थापित हैं। आप का साहित्यिक जीवन जनपक्षधरता की एक उज्जवल मिसाल हैं। आपके व्यंग्य लेखन में जहाँ सामाजिक, राजनीतिक व नैतिक विडंबनाओं पर एक कुठाराघात है वही प्रयोगवादी अर्थों में आपश्री के मुक्त हस्त से लिखें व्यंय लेख समाजव देश में नवीन चिंतन व सोच को नवीन दिशा देने में समर्थ है आपकी विचार दृष्टि भारतीय साहित्य के समग्र संदर्भ से जुड़ी हुई है।
आपश्री की सन् 1970 से देश की सभी पत्र,पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित रचनाओं में रोम-रोम से जीवित साहित्यप्रेमी आम आदमी की आकांक्षाएँ हिलोरे लेती है आपश्री की रस रूचि, तुलनात्मक, आलोचनात्मक ,सुखापेक्षी मनोवैज्ञानिक रचना कौशल से परिपूर्ण आपकी लेखनी के कारण अनेक वर्षों से लगातार आकाशवाणी से व्यंग्य विनोद वार्ताएं प्रसारित होती रहतीं हैं। धन्य है आपश्री की कि साहित्य सेवी व साहित्य साधिका अर्द्धांगिनी श्रीमती ज्योत्सना इन्द्रेश ंजी भी, जो कि आपश्री की सही अर्थों में अर्धांगिनी है और आपका साथ एक मणिकांचन संयोग को दर्शाता है। आपश्री के उत्कृष्ठ रचना कौशल हेतु आपश्री को देश के अनेक प्रान्तो से ‘‘विश्व हिन्दी सम्मेलन का हिन्दी सेवी सम्मान’’, ’’लायन्स सृजन सम्मान,’’’युगधारा साहित्य रत्न सम्मान’’, कला श्रृंखला-साहित्य शिरोमणि सम्मान प्राप्त हुए हैं। सम्मान व पुरस्कारों की सुदीर्घ श्रृंखला आपके यशस्वी रचना संसार के इंद्रधनुषी चितराम हैं।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
अर्चन और अभिनंदन हो, जगभर कीर्ति कीर्तन हो,
दिशा दिशा में आपका चर्चा, आराधन और वंदन हो
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
श्रेष्ठ कहानीकार, संवेदनशील कवयित्री, ऊर्जावान बाल साहित्यकार एवं चंदन चर्चित व्यक्तित्व की स्वामिनी
परम सम्माननीय डॉ. विमला भंडारी साहिबा.....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018,उदयपुर
आकर्षक व्यक्तित्व आपका, रहा कृतित्व महान।
नवयुग के उजियारी वर्तिका सी, अनुपम है पहचान।।
हे अक्षय कीर्ति की उज्ज्वल वर्तिका!
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। आपश्री ने राजस्थान के झीलों के शहर में पिता श्रीमान कृष्ण झंवर सा. के घर में एक फरवरी 1955 को ममतामयी मातुश्री श्रीमती कंचन देवी श्री झंवर की पावन कुक्षि से जन्म लेकर अपनी ऊर्जावान व सृजनशील उत्कृष्ट जीवन शैली से आपने सभी को प्रभावित किया है और अपने शानदार व्यक्तित्व के द्वारा ‘‘कुलं पवित्रं, जननी कृतार्थं, वसुंधरा भाग्यवती च तेन’’की उस पवित्र उक्ति को सर्वार्थ चरितार्थ किया है।
हे श्रेष्ठ जनप्रतिनिधी!
राजस्थान में सलूंबर क्षेत्र की एक ओजस्वी, प्रखर वक्ता तथा बेदाग़ राजनीतिक नेतृत्व में दृढ़ता व विवेकपूर्ण निर्णय शैली के कारण आपका व्यक्तित्व सदैव उजला रहा है। सलूबंर जैसे पिछड़े आदिवासी बहुल क्षेत्र में आपने अपनी संवेदनशील दृष्टि से अनेक जन कल्याणकारी कार्यक्रमों व राजकीय कार्यक्रमों व योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाया है। इसीलिये आज भी आपको यहाँ का जनमानस एक श्रेष्ठ मानवीय विभूति के रूप में स्मरण करता है। अपने ज़िला परिषद की सदस्यता के कार्यकाल के दौरान, सहधर्मी रचनाकारों के प्रति सौम्य, मैत्रीपूर्ण, स्नेहिल एवं सदाशयता से परिपूर्ण आपके संवेदनशील व्यवहार में पर्याप्त कठोरता का मणिकांचन संयोग आप की कार्यशैली को विशिष्टता प्रदान करते हैं।
हे यशस्वी साहित्यसेविका!
आप जैसी विभूति के उज्ज्वल मुखारविंद से इतिहास का दर्पण निखरता रहता है। जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश, चंद्रमा की शीतलता एवं जल के रंग का अनुवाद संभव नहीं है, आज उसी प्रकार आपके यशस्वी ऊर्जावान मंगलकारी जीवन का गुणानुवाद करने में हमें शब्दों का नितांत दारिद्रय् अनुभव हो रहा है। विश्व के 111 हिन्दी लेखिकाओं में शामिल, आपश्री के लेखन व व्यक्तित्व पर डॉ. विमला भंडारी की रचनाधर्मिता’’ पुस्तक ( ले0 श्री दिनेश कुमार माली2015) लेखन आपश्री की लोकप्रियता दर्शाता है। आपश्री की 1000 से भी अधिक समसामयिक रचनाओं से आपने देश भर के सुधि पाठकों को प्रभावित किया है, वहीं संलूबर में ‘सलिला’ नामक साहित्यिक संस्था की स्थापना के साथ, अनेक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंचो पर सदा आपकी भावपूर्ण, सार्थक अमृत वाणी से सभी को प्रेरणा के अनेक जीवन मंत्र प्राप्त होते रहते हैं। बालकों व देश के नौनिहालों के प्रति एक उत्कृष्ट प्रेम व स्नेह के वशीभूत आपश्री ने सन् 2011 से लगातार सलूंबर जैसे छोटे कस्बे से बाल साहित्यकारों के विशाल राष्ट्रीय कुंभ के सफलतम आयोजनों से यह सिद्ध किया है कि एक दृढ़ संकल्प शक्ति के द्वारा ही आप बाल साहित्य की चेतना की कितनी समर्थ प्रहरी बन चुकी हैं। आपके हिन्दी व राजस्थानी भाषाओं में प्रकाशित समृद्ध साहित्य संसार में भाव पूर्ण कविताओं, कहानियों, नाटकों, में बड़ा आकर्षण है, सफ़रनामा सलिला का- नामक डॉक्यूमेंट्री के साथ आपश्री ने ‘सलूंबर का इतिहास’ नामक पुस्तक से, व ‘‘युगयुगीन सलूंबर’’ नामक डॉक्यूमेंट्री द्वारा संलूबर की धरा को विख्यात किया है। सृजन के लिये आपने 30 वर्षों में अनेक प्रान्तों की यात्रा कर साहित्यिक सम्मेलनों में ऊर्जा का संचार किया है। अपनी सृजनशक्ति के आधार पर आपश्री देश की लगभग अनेकानेका साहित्यिक संस्थाओें व अकादमियों से दो दर्जन से अधिक उच्च साहित्यिक पुरस्कार व सम्मान से विभूषित व निरन्तर कीर्ति के पंखो पर सवार हैं।
धन्य है आपकी लेखनी, आपकी मेधावी वाणी और आपका विलक्षण, प्रतिभावान व्यक्तित्व! आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं तनिमा साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे!
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
सरस काव्य कला कोविद, सुधि गीत रचयिता ,वाग्देवी के यशस्वी ,लाडले सुपुत्र एक चंदन चर्चित प्रज्ञा पुरुष
परम सम्माननीय कवि श्रीमान श्री गिरीश विद्रोही साहब....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’.....
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
’सलीबें लेकर अपनी ख़ुद चले हैं अपनी राहों में,
यही तो अच्छे लोगों की एक पहचान है जग में ’
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। अपने स्वतंत्रता सेनानी पिता पं श्रीमान रघुनाथ जी पालीवाल के घर एवं माता श्रीमती उमा देवी जी पालीवाल की पावन कुक्षि में दिनांक 27 अप्रैल 1954 को नाथद्वारा में जन्मे आप श्री हिंदी ,राजस्थानी व ब्रज भाषा में विगत 40 वर्षों से अनवरत सृजनशील रहे हैं। हमें गर्व है कि नाथद्वारा क्षेत्र में राजकीय शिक्षण क्षेत्र में एक श्रेष्ठ शिक्षक रहते हुए, देश के यशस्वी मूर्धन्य कवियों के साथ, अधिकांश प्रांतों में काव्यपाठ मंच संचालन करते हुए,,आप एक जीवंत अक्षर पुरुष की तरह वर्षों से साहित्य-सृजन की सरस अभिव्यक्ति में निमग्न हैं। हमें गर्व है कि विगत चार दशकों से, श्रृंगार, आध्यात्म, करुणा के संवेदनशील पर सवार आपश्री की अद्भुत, प्रांजल काव्य शैली में, ‘संवेदनात्मक युग चेतन बोध’ का, मंजुल मिश्रण सभी को आकर्षित कर रहा है। आज संपूर्ण काव्य जगत आपश्री को लोकमंगल और मानवता के उत्थान की एक, आग्रही उपकार की प्रतिमूर्ति के रूप में देखता है, यही आपकी लेखनी का सम्मान है। राष्ट्रीय वैचारिक चिंतन, लोक संस्कृति और भाषा के उन्नायक आपश्री शाश्वत जीवन मूल्यों के साथ व्याकरणिक हिंदी, राजस्थानी, ब्रज भाषा में उदार, गंभीर, मगर लालित्यपूर्ण काव्यपाठ और मंच संचालन के लिए एक उत्कृष्ट नाम हैं। एक घने वट वृक्ष की भांति वर्षों से आपने कई काव्य प्रसूनों को खिलने का वरदान प्रदान किया है। आपका मौलिक शब्द कौतुक और संवेदनाजन्य काव्य-संसार एक सुंदर जीवन यात्रा है जो नवीन पीढ़ियों के लिए उपयोगी और सामाजिक बोध की एक प्रेरक विरासत है। साहित्य मंडल-नाथद्वारा से ‘ब्रज भाषा भूषण’,‘मेवाड़ भूषण’, द्वारकेश राष्ट्रीय परिषद कांकरोली से ‘कवि घनश्याम प्यारे सम्मान’, शाहपुरा से ‘कवि मोहन मंडेला सम्मान’ इंदौर से ‘राष्ट्रीय एकता सम्मान’, दिल्ली से ‘अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सम्मान’ व ‘राष्ट्रीय कवि सम्मान’ आदि पुरस्कार और सम्मान की सुदीर्घ श्रृंखला आपके यशस्वी काव्य संसार के इंद्रधनुषी चितराम हैं। आप का यह चिंतन सब को प्रेरणा देता है...
‘‘हमने दुःख के महासिंधु से सुख का मोती बीना है और उदासी के पंजों से हँसने का सुख छीना है
मान और सम्मान हमें ये याद दिलाते है पल पल, भीतर भीतर मरना है पर बाहर बाहर जीना है। ’’
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे !
सूरज रोज संवारे दिन को, चाँद मधुर सपने ले आये,
हर पल समय दुलारे आपको, सदियों तक पहचान पायें।।
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
सुर कोकिला ,स्नेह- अनुराग की पावन मूर्ति, विदुषी शिक्षिका एवं संवेदनशील काव्य साधिका!
परम सम्माननीय श्रीमती प्रेमप्यारी भटनागर साहिबा.....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
तू है प्यार का साज इस नफरत की दुनिया में, गनीमत है तेरी आवाज इस नफ़रत की दुनिया में,
धड़कता है दिले-हिंदुस्तान आवाज में तेरी, निराला है तेरा अंदाज इस नफ़रत की दुनिया में !!
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी शहर के कुलीन एवं प्रतिष्ठित परिवार में पिता श्री राम नारायण जी भटनागर के घर एवं मातुश्री कृपाल देवी जी भटनागर की पावन किक्ष में 11 नवंबर 1940 को जन्मीं ’आपश्री ’का मेधवी, प्रतिभावान व काव्यमय सुरीला जीवन प्रेरणा का बैकुंठ है, जहाँ से प्रेरणाओं के अमित झरने छलकते हैं। हमें गर्व है कि स्वयं पर आश्वस्त ,श्रम करती आपश्री की हथेलियों ने 32 वर्षीय राजकीय शिक्षा क्षेत्र में प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त होकर विज्ञान की प्राध्यापिका रहते हुए, अपनी छात्राओं को उदारता से, ज्ञान का वह ख़ज़ाना दिया है कि आज भी यत्र-तत्र अनेक उच्च पदों पर आसीन होकर आप की छात्राएँ, आपके समक्ष एक कृतज्ञता के भाव से नतमस्तक व करबद्ध खड़ी होती है, यही आपकी वाणी, विद्वता, व्यवहार कुशलता एवं श्रेष्ठ व्यक्तित्व का सम्मान है।
‘‘असर लुभाने का कशिश आपके बयान में है, किसी की आँख में जादू आपकी ज़ुबान में है।’’
वर्षों से नगर की अभिव्यक्ति और नवकृति जैसी साहित्यिक संस्थाओं की उच्च पदाधिकारी रही हैं। उदयपुर शहर के महाराणा प्रताप‘‘वरिष्ठ नागरिक संस्थान,’’‘‘ महाराणा कुंभा वरिष्ठ नागरिक क्लब’’ और ‘‘वरिष्ठ नागरिक-मुस्कान क्लब’’ की सक्रिय ,कर्मठ सदस्य एवं पदाधिकारी आप श्री को शिक्षा साहित्य में समाज सुधार के कार्यों में ज़िला प्रशासन, शिक्षा विभाग सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग-उदयपुर, वरिष्ठ जन सम्मान, रोटरी क्लब सम्मान-शिक्षण क्षेत्र में ,रोटरी क्लब मीरां द्वारा वरिष्ठ महिला सम्मान, एसआईईआरटी-उदयपुर, ‘‘कला श्रृंखला-उदयपुर’’-’ग़ज़ल कोकिला, ऑल इंडिया मैजिक फैडरेशन कला श्रृंखला द्वारा व कवि शिरोमणि’ की उपाधि से विभूषित है।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
यह चिराग बे नज़र हैं, यह नज़र भी बेजुबां है,
अभी तुमसे मिलता-जुलता कोई दूसरा कहां है?
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
सुर कोकिला ,स्नेह- अनुराग की पावन मूर्ति, विदुषी शिक्षिका एवं संवेदनशील काव्य साधिका!
परम सम्माननीय पत्रकार, संपादक श्री हिम्मत सेठ साहब.....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
.‘‘मंज़िलों पर पहुँचना भी खड़े रहना भी, कितना मुश्किल है बड़े होकर बड़े रहना भी।
तेज़ आंधी में जलना अपने दम पर सदा, कितना मुश्किल है चिरागों का खड़े रहना भी।।’’
हे निर्भीक एवं निडर समाजचेत्ता पत्रकार!
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। उदयपुर में आप श्री का जन्म 31 दिसम्बर 1946 को एक कुलीन व प्रतिष्ठित परिवार में पिता श्री भूरी लाल जी सेठ व मातुश्री श्रीमती पान बाई जी की पावन कुक्षि में हुआ। आपश्री के जीवन में पत्रकारिता की गंगा, सत्य-चेतना की यमुना और निर्भिकता व हिम्मत की सरस्वती का ऐसा संगम हुआ है कि आपश्री ने हिम्मत से अपने निर्भीकता से पत्रकारिता करते हुए आजीवन अपनी बुनियादी नीतियों से कभी भी कोई समझौता नहीं किया व सामंतवादी, सांप्रदायिक ताकतों के ख़िलाफ़, समाजवादी दृष्टिकोण अपनाया और अपने आदर्श प्रख्यात समाजवादी प्रणेता राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों के चलते रहे। जाति प्रथा के विरोधी रहते हुए आपश्री का लक्ष्य समाज में व्याप्त बुराइयों एवं कुरीतियों को ख़त्म कर भ्रष्टाचार व नशाखोरी का नाश करने का रहा है।
आपश्री ने पॉलिटेक्निक कॉलेज से इन्जीनियरिंग को छोड़ समाजवादी आन्दोलन में स्वयं को जोड़ा एवं तभी हिन्दुस्तान जिंक से 6 साल के कार्यकाल में इंटक के श्रमिक विराधी कार्य के विरोध में सशक्त आवाज़ उठाई व अपनी नौकरी तक गंवा दी। ।1977 से ही आप जनता पार्टी के सक्रिय सदस्य रहे। धर्मांधता, भारत पाक एकता, जल, सूखा व विस्थापन, वैश्वीकरण, वैकल्पिक मीडिया, आमजन की पीड़ा, मीडिया मुस्लिम समाज में शिक्षा सुधारवादी दाऊदी बोहरा समाज के आंदोलन, उदयपुर मास्टर प्लान, ग्रामीण शिक्षा में बदलाव, पानी की आपूर्ति नगर में सुपर स्मेल्टर की स्थापना, आतंकवाद सांप्रदायिकता विरोधी सम्मेलन के जरिए आपश्री ने समता संदेश से समाज में जागृति के सुर यत्र-तत्र-सर्वत्र बिखेरे हैं। महावीर समता संदेश की अब तक की राष्ट्रीय समता लेखक सम्मेलनों की सुदीर्घ श्रृंखला में आपश्री अनेक राष्ट्रीय व सामजिक चेतना के मुद्धों को उठाने में सफल रहे हैं। वहीं विगत 4-5 वर्षों से अपने ही निवास पर जनजागृति के लिए पर्यावरण, शिक्षा, राजनीति, सांप्रदायिक सद्भाव के राष्ट्रीय व स्थानीय मुद्धों व अनेकानेक सामाजिक समस्याओं को लेकर प्रबुद्ध जनों की बैठक आयोजित कर अपनी विलक्षण चेतना का परिचय दे रहे हैं। आज समस्त पत्रकारिता जगत आपकी लेखनी के आगे नतमस्तक है।
‘‘राजस्थान भाईचारा सम्मान- जयपुर’,’ ‘‘हिंदी रत्न सम्मान-राष्ट्रीय हिंदी परिषद- उत्तर प्रदेश’’, ‘‘पत्रकारिता सम्मान-अखिल भारतीय भाषा विकास संगठन’’ एवं यू.एस.एम.पत्रिका-ग़ाज़ियाबाद हिंदी सेवा सम्मान’’, ‘‘राष्ट्रीय हिंदी अकादमी-रूपांबरा कोलकाता’’, पत्रकारिता व समाज सेवा हेतु अदबी संगम सम्मान’’ उदयपुर, आदि पुरस्कार और सम्मान की सुधीर्घ श्रृंखला आपके यशस्वी काव्य संसार के इंद्रधनुषी चितराम हैं।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...!
संवेदन शील, प्रखर कवि, मुखर वक्ता व श्रेष्ठ पत्रकार,
सम्माननीय कवि व पत्रकार डॉ. कुंजन आचार्य .....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
सत्य ही स्त्रोत सभी शब्दों का,पाई न सूखने ज्ञान -विवेक की धारा,
बातें सारी सोची-विचारी, सार्थक ,साहित्य पत्रकारिता से जीवन है उजियारा।।
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। 30 जून 1976 को श्री कृष्ण धाम सांवरिया जिया में पिता श्री अध्यापक एवं ज्योतिषी रमेश आचार्य के घर व मातुश्री श्रीमती रेणुका आचार्य जी की पावन किक्ष में जन्मे आपश्री ने सृजन की अभिलाषा में, हिंदी साहित्य और पत्रकारिता में अपनी छोटी सी उम्र में ही श्रेष्ठ पहचान बनाली है। पत्रकारिता की विश्वसनीयता के साथ नवीन आदर्शों और लक्ष्यों को लिए हुए भारतीय संस्कृतिजन्य वैचारिक और साहित्यिक प्रवृतियों की ओर अग्रसर आपका जीवन भविष्य के पत्रकारों के लिए एक उजली पगडंडी है। हिंदी साहित्य और पत्रकारिता में आपश्री ने प्रिंट मीडिया में जय राजस्थान मीडिया में कार्य करते हुए ही मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में सर्जनात्मक पत्रकारिता पर पीएचडी करते हुए आपने सृजन की अभिलाषा को नए आयाम दिए हैं। व्यावहारिकता के साथ सुनियोजित ढंग से आत्मविश्वास पूर्ण नज़रिए से आपश्री ने प्रिंट मीडिया में जय राजस्थान, प्रतिदिन दैनिक, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में राजस्थान, उत्तर प्रदेश उत्तराखंड जैसे मीडिया संस्थानों में संवाददाता से लेकर संपादक की भूमिका निभाई है। ईटावी-के हैदराबाद केंद्र से पत्रकारिता का अमिट व असीम अनुभव अर्जित करते हुए वर्तमान में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में ‘‘असिस्टेंट प्रोफेसर प्रभारी’’ के पद पर सुशोभित है है।
किसी भी राष्ट्र के विकास में पत्रकारिता एक अहम भूमिका निभाती है। वर्तमान सूचना प्रौद्योगिकी की नवीन आधुनिक युक में आपश्री अपने प्रबुद्ध, दूरदृष्टि पूर्ण निर्देशन में पत्रकारिता के अनेक जिज्ञासु विद्यार्थियों के लिए अनुसंधान एवं अध्यापन प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक दृश्य श्रव्य पत्रकारिता के क्षेत्र में अनंत अवसर प्रदान कर रहे हैं वह श्लाघनीय है। एक आतंकहीन, बलवान, न्याय संगत समृद्धिवान, लोकसंस्कारित समाज की रचना में आप श्री के लिए अपनी वाणी का महत्वपूर्ण स्थान है।
आपश्री की शताधिक कविताएँ व फीचर, शोध आलेख देश भर की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। केंद्रीय साहित्य अकादमी, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, तथा नेशनल बुक ट्रस्ट के विभिन्न प्रकल्पों में आप सदैव अग्रणी रहे हैं। अब तक आप ही के निर्देशन में चार शोधार्थियों की पीएचडी अवार्ड हुई है और चार वर्तमान में शोधरत भी हैं। आप का कविता संग्रह ‘‘एक टुकड़ा आसमान’’, ‘‘समाचार पत्रों में साहित्य( शोध-2013) कंटेंपरेरी मास मीडिया (रिसर्च 2016 )संवाद सेतु (माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 11व12 ं की अनिवार्य हिंदी की मीडिया शिक्षण पुस्तक में सदस्य लेखक-2107संचार का नया माध्यम वेब रेडियो-(2018) आपके प्रकाशित पुस्तकें आपके सशक्त विचारों का अतुलित संग्रह हैं।
‘‘इंपिटस संस्थान -उदयपुर का सम्मा- 1992’’, कविता और सर्जनात्मक लेखन के लिए महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन का महाराणा राजसिंह पुरस्कार-1995, राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार-1995, कविता संग्रह-एक आसमान को राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार,’’ सन 2000 साहित्य कला एवं संस्कृति संस्थान, महाराणा प्रताप हल्दीघाटी द्वारा साहित्य का गौरव सम्मान-2017, ‘‘लेक सिटी प्रेस क्लब-उदयपुर द्वारा वरिष्ठ पत्रकार सम्मान 2018’’ आदि पुरस्कार और सम्मान की सुधीर्घ श्रृंखला आपके यशस्वी काव्य संसार के इंद्रधनुषी चितराम हैं।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
हो चित्त जहां भय शून्य, माथ हो उन्नत, हो ज्ञान जहाँ पर मुक्त, उस जगह आप विचरें।
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
अदबी दुनिया में शीरीं ज़ुबान के युवा शायर, सुधि दोहा रचयिता,एक संजीदा व सलीक़ेदार इंजीनियर,
उर्दू शायरी व अदब के गुलशन के महकते गुलाब जनाब अनस ख़ान सा..
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
हददर्द है आप नेक हैं आप दयावान हैं बस आपकी दिलों में ये पहचान है!
हे शोहरतों की बुलन्द राहों के संजीदा मुसाफ़िर !
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। एक उजले ख़ानदान में सन् 1984 में वालिद जनाब आसिफ खान साहब के घर और और मोहतरमा रिहाना आसिफ की पाक कोख में जन्में आपश्री ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एम टैंक कर अपने यौवन काल में जिस तरह शायरी की ओर अपनी खि़दमतों को अंजाम दिया वह क़ाबिले तारीफ़ है। आपश्री ने सन्-2004 से अपने अल्फाज़ और कलम को तेजधार देते हुए, जिस क़दर अदबी दुनिया में अपनी असरदार और सलीकेदार जुबान में छंद, दोहे व अपनी शायरी से इस कम उम्र में ऊँचा नाम हासिल किया है, उस के लिये आपको दिली मुबारक़बाद! अब तक सामाजिक सरोकारों और दौरे हाज़िर पर देश व समाज को समेटते हुए 400 से अधिक दोहे लिख चुके आपश्री ने वैज्ञानिक विषयों पर भी क़लम चलाते हुए उर्दू में श्रेष्ठतम दोहे रचे हैं और अपनी अदबी ख़िदमात का परिचय कराते हुए देश के विविध काव्य मंचों पर अपने शायरी का रुतबा स्थापित किया है। हमें गर्व है कि आप अपनी प्रतिभा और मेधा का परिचय कराते हुए वर्तमान में आपश्री हरियाणा के गुरुग्राम शहर में अमेरिकन कंपनी हनीवेल के क्षेत्रीय प्रबंधक है और लगातार अदब की ख़िदमात में भी जुटे हुए हैं।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे। आपश्री ने सदा इस ख़याल को अपने दिल के पहलू में रक्खा है....
हयात ले के चलो, क़ायनात ले के चलो
चलो तो सारे जमाने को साथ ले के चलो
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
जुझारू पत्रकार, युवा कवि व शायर, लघु कथाकार व कहानी लेखक, संजीदा जनसंपर्क अधिकारी
प्रतिभाशाली कवि, पत्रकार श्री गौरीकान्त शर्मा साहब...
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
प्रख्यात कवि व चिन्तक लेखक पाब्लो नेरुदा की तर्ज पर आपश्री ने कहा कि....
‘‘सचमुच मैं हूँ साझीदार सिर्फ़ प्रकाश फैलाने का,
मैंने चाहा होना-सामान्य व्यक्ति की तरह,
संघर्ष में नहीं पाया मुझे अनुपस्थित कभी।’’
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। आठ फरवरी 1978 को उदयपुर के श्रीमान फतह लाल जी शर्मा सा. के घर श्रीमती गीता देवी शर्मा जी की पावन कुक्षि से जन्मे युवा कवि, गज़लकार, लघु कथाकार, कहानी लेखक एवं वर्तमान में राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग-उदयपुर में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में आपश्री ने, अपने संपूर्ण जीवन को उत्कृष्ट लेखनी की इंद्रधनुष विधाओं में स्वयं को स्थापित कर रखा है। इतनी अल्पायु में भी अपने पत्रकारिता के सुदीर्घ अनुभवों से आज जिस गुरूतर दायित्व की चुनौतियाँ जो, आपके साम्मुख उपस्थित हैं, उन्हें आपश्री उल्लसित एवं दायित्व पूर्ण होकर सँभाल रहें हैं यह सभी के लिये एक उत्तम आदर्श है। सुदर्शन सदृश्य काल चक्रों पर सवार गोलाकार समय सारथी का शाश्वत स्वभाव सतत् परिवर्तनशील होता है यह समय ही आपश्री के संघर्षमय जीवन का साक्षी रहा है
बी.एस.सी,एम.ए.,बी.एड. एम.बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त कर आपश्री ने राजकीय अध्यापक के रूप में अपना जीवन शुरु किया मगर आपको किसी गमले के पौधे सा नहीं किसी बरगद का सा अपना जीवन गढ़ना था, इसीलिये आप श्री ने मीडिया के दुनिया में क़दम रक्खा। एक जुझारू कर्मण्य और उदारमना, टीवी पत्रकार के रूप में हैदराबाद, जयपुर, बीकानेर व उदयपुर, कई शहरों,महानगरों में ईटीवी नेटवर्क में 8 वर्षों तक के रूप में अपनी सेवाएँ दी । देश भर में अनेक पत्र पत्रिकाओं में नियमित लेखन के साथ आपश्री ने आकाशवाणी व यूटृयब चैनलों पर अपनी सारस्वत काव्य धारा बहाई है। श्रीमन्! आपकी सोच एक दीपक भांति है जो कहता है कि...
मैं जलता रहूँ निरन्तर बस जलता रहूँ , कालिमा के गाल पर मैं लालिमा मलता रहूँ
वक्त़ के साथ चलते हुए, अपने परिवेश, समाज, संस्कृति में न्यायप्रियता, तार्किक एवं विश्लेषणात्मक बौद्धिक कौशल, विशिष्ठ अभिव्यक्ति, जन-जन से गहन सम्पर्क और किसी मुद्दे पर परत दर परत तक सूक्ष्मावलोकनोपरांत न्यायोचित तार्किक विवेचन करते हुए निर्भीक होकर श्रेष्ठ निर्णय देने जैसी कई विशिष्ठताएँ आपश्री जैसी बहुमुखी प्रतिभा के धनी को माता सरस्वती ने प्रदान की है। अपने व्यवहार कुशलता है विनय शीलता से यश कीर्ति के पंखो पर सवार रह आपश्री बचपन से ही संघर्षशील रहे। मगर आप श्री ने... अपना जमाना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल, हम वो नहीं कि जिन को जमाना बना गया! इस ‘‘शेर’’ की तर्ज पर अपनी हिम्मत, संकल्प शक्ति, अपनी प्रतिबद्धता व पक्के इरादे से आज वह मुकाम हासिल किया है जिसे पाने के लिए सैकड़ों लोग आज भी प्रतीक्षारत हैं। राजस्थान साहित्य अकादमी की संवालिका व सरस्वती सभा के युवा सदस्य के बतौर हाल ही में आपने राजस्थान साहित्य अकादमी भरा युवा लेखक सम्मेलन का सफल व सार्थक आयोजन किया व संपूर्ण राजस्थान के साहित्यकारों की प्रशंसा व सराहना हासिल की।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
जन मन रंजन करें वंदन, हम जनमंगल कर जाएँं,
आपका सारस्वत व्यक्तित्व, हम सुयश सुमंगल गाएँ
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
असीम प्रतिभापुंज, बुलन्द हौसले की जीवटधारी, युवा कवयित्री व श्रेष्ठ प्रेरणाशाली व्यक्तित्व
मेधावी शिक्षिका व प्रतिभाशाली कवयित्री डॉ. कृष्णा जाँगिड़...
‘‘के पाणि पल्लवों में सस्नेह अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है,
हवा की ओट भी ले कर चराग जलता है।
राजस्थान प्रदेश के हनुमानगढ़ ज़िले के छोटे से गाँव मेंएक साधारण कृषक परिवार में पिता श्री देवी लाल जी जाँगिड़ के घर व ममतामयी मातुश्री श्रीमती गुड्डी देवी जाँगिड़ की पावन कुक्षि में आप का जन्म किसी दैवीय उपकार व चमत्कार से कम सिद्ध नहीं हुआ है। एक तेजस्विनी की तरह ही बचपन से ही शिक्षा व साहित्य के प्रति अगाध लगन ने आज आपको आज उस ऊँचे मकाम पर पहुँचाया है। विगत दो वर्षां से राजकीय विद्यालय में राजस्थानी भाषा की प्रथम श्रेणी की व्याख्याता के रूप में पदस्थ आपने पूर्व में ही अपनी, मेहनत लगन व मेधा से यूजीसी नेट की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर अव्वल दर्जा हासिल किया जिस पर आपके गुरुओं, गाईड, माता पिता-परिजन सभी को बेहद नाज़ है। बहुत ही हर्ष व गर्व का विषय है कि आपने अपनी छोटी सी आयु में ही अपने गाँव जसाना (नोहर )में अनेकानेक बालिकाओं को विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के लिय प्रेरणा दी व तमाम विरोधों के बावजूद अपने लक्ष्य को पाने में सफल रहीं। जिसके लिये आप जैसे सुदक्ष, सुललित एवं प्रतिभाशाली मेधावी व्यक्तित्व को ग्राम पंचायत जसाना ने ‘‘गाँव की रोशनी’’ का खि़ताब दिया। आप अपने संपूर्ण क्षेत्र में इसीलिये आप इतनी लोकप्रिय हैं कि सर्वत्र जन जन आपसे आपकी प्रतिभा व आपकी ऊर्जावान जीवनशैली से परिचित है। अपने गाँव में आप प्रथम पीएचडी प्राप्त गौरवशाली वो विभूति हैं जिन्होंने प्र्र्रथम बार ‘‘राजस्थानी भाषा में महिला काव्य लेखन’’ विषय पर पीएचडी कर के डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। मरुधरा में साहित्य के कीर्ति शब्दों की संवेदनशील बांसुरी के आजीवन साधिका के रुप में, आपने जिस तरह हिन्दी व राजस्थानी साहित्य सागर को समृद्ध बनाया है, वह श्लाघनीय है। आपकी ‘‘छोरी री जात व टींबड़ली शीर्षक की काव्य श्रृंखला आपको एक चेतनाशी गंभीर संवेदनशील कवयित्री के रूप में स्थापित करती हैं। राजस्थानी भाषा की एक प्रथम श्रेणी की एक प्रखर राजकीय शिक्षिका के रूप में, मरूधरा राजस्थान की मीठी व मनभावन भाषा का ज्ञान के विस्तार हेत आज जिस गुरूतर दायित्व की चुनौतियाँ के साथ उन्हें आप उल्लसित एवं दायित्व पूर्ण होकर सँभाल रहीं हैं यह एक गौरव का विषय है। अद्भुत स्मरण शक्ति, न्यायप्रियता, तार्किक एवं विश्लेषणात्मक बौद्धिक कौशल, विशिष्ठ अभिव्यक्ति, संवेदनशील मगर निर्भीक होकर श्रेष्ठ निर्णय देने जैसी कई विशिष्ठताएँ आप जैसी बहुमुखी प्रतिभा के धनी को वीणापाणि माँ सरस्वती ने प्रदान की हैं। आपको अपनी योग्यता व प्रतिभा हेतु हनुमान गढ़ ज़िलाघीश द्वारा गएातंत्र दिवस सम्मान, उदयपुर मे माइ्र गुरुकुल व राजस्थान पत्रिका सम्मान, वूमेन ऑफ सबस्टेंस सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
मान मिले सम्मान मिले, खुशियों का वरदान मिले,
कदम-क़दम पर मिले सफलता, डगर-डगर उत्थान मिले।
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
संवेदनशील कवयित्री, ऊर्जावान लेखिका एवं चंदन चर्चित, सुन्दर व्यक्तित्व की स्वामिनी...
सम्माननीय रचनाकार श्रीमती मोनिका गौड़ साहिबा.....
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018,उदयपुर
आकर्षक व्यक्तित्व आपका, रहा कृतित्व महान।
नवयुग के उजियारी वर्तिका सी, अनुपम है पहचान।।
हे अक्षय धवल कीर्ति की उज्ज्वल वर्तिका!
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा की एक विनम्र अभिव्यक्ति है। 12 अगस्त 1972 को बीकानेर-राजस्थान के श्रीमान जगदीश जी शर्मा सा. के घर श्रीमती कौशल्या देवी शर्मा जी की पावन कुक्षि से जन्मीं आपश्री ने स्नातक ’’गृहविज्ञान’’ करने के बाद राजस्थानी, समाजशास्त्र और हिन्दी साहित्य में स्नातकात्तर डिग्री व, राजस्थानी साहित्य में नेट उत्तीर्ण करने के साथ ही निरन्तर अपनी वैचारिक ऊर्जा से मेधावी सृजनशीलता का सारस्वत अनुष्ठान रचा है। हिंदी एवं राजस्थानी भाषा में सृजनात्मक शक्ति के साथ जीवन की कटु सच्चाईयों को उकेरता, कलात्मक प्रज्ञा, जुझारूपन, निडरता और स्पष्टवादिता का मिला-जुला, विशिष्ट लेखन आपश्री को एक असाधारण कवयित्री और लेखिका के रूप में प्रतिष्ठित करता है। ‘‘शब्दश्री साहित्य संस्थान’’ की संस्थापक व मानद अध्यक्ष के रूप में राजस्थानी भाषा साहित्य व संस्कृति अकादमी के साथ, बीकानेर ज़िले में प्रथम बार आपश्री ने राजस्थानी लेखिका सम्मेल’ 2013 का सफल आयोजन किया जो आज तक स्मरणीय है। एक मधुर व आकर्षक खिलखिलाहट के साथ, वर्तमान के मशीनों के शोर में, भावनाओं की कोमलता और मन की अंदरूनी रूमानियत को ज़िंदा रखने के लिए, शहर, समाज में साहित्यिक ऊर्जा और साहित्य गर्माहट के लिए आपश्री जिस रफ़्तार से अपनी उत्तम लेखनी व सहज ओजपूर्ण वाणी का सहारा ले रही हैं, वह सचमुच श्लाघनीय है। महिला वर्ग की घनीभूत पीड़ा को उजागर करती हुई, आपश्री अपनी रचनाओं में नन्ही ग्रामीण बालिकाओं और कामगार महिलाओं के दर्द को भी उजागर करती रहती हैं। अब तक आपश्री ने’’अपने आप से अपरिचित’’ शीर्षक से हिन्दी कविता संग्रह,’’हथेळी में चांद’’ शीर्षक से राजस्थानी कविता संग्रह-राजस्थानी भाषा साहित्य संस्कृत अकादमी बीकानेर से प्रकाशित, ’’हरी-हरी खुशबू और काली गौरेया’’ हिन्दी कविता संग्रह-राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर से प्रकाशित,‘‘इण स्हैर रा लोग’’ राजस्थानी अनुवादित कविता संग्रह प्रकाशित’’इस शहर के लोग’’ माणिक बच्छावत के कविता संग्रह का अनुवाद’’ उपरोक्त कृतियों के सृजन द्वारा अपनी उच्च कोटि की साहित्यिक प्रतिभा का परिचय दिया है। दूरदर्शन जयपुर व अन्य टीवी चैनल्स तथा आकाशवाणी बीकानेर केन्द्र से पिछले 16 वर्षों से लगातार, अपनी हिन्दी राजस्थानी भाषा की कविताओं, परिचर्चाओं, समसामयिक वार्ताओं के ज़रिये व एक ड्रामा आर्टिस्ट के रूप में श्रोताओं से जुड़ाव बनाये रखते हुए आप श्री ने शब्द व कविता को हथियार बनाकर अपने सृजन से सह सिद्ध कर दिखाया है कि आपश्री आशा और जिजीविषा की उदात्त साहित्य सृजिका व कवयित्री हैं। प्रदेश व प्रदेश के बाहर आगरा, मथुरा सहित कई स्थानों पर आयोजित कवि सम्मेलनों में 1992 से निरन्तर सहभागिता व रचना पाठ करते हुए आपश्री ने सदैव हिन्दी, राजस्थानी की पुस्तकों की समीक्षात्मक, आलोचनात्मक दीठ से, शब्दों और भावों को प्रगट किया और उन पर अनेक साहित्यिक मंचों पर पत्रवाचन द्वारा शब्दों से निरन्तर साक्षात्कार भी करतीं रहीं हैं। आपश्री का साहित्य के इतर इसरो अहमदाबाद सें ’’ग्रामसेट’’ के प्रशिक्षणोपरान्त बाल सुरक्षा व महिला सुरक्षा से जुड़े अनेक इवेन्ट्स में कार्य और लाईव टेलीकास्ट एचआईवी/एड्स के क्षेत्र में जन-जागृति व वैयक्तिक अवेयरनेस के प्रचार-प्रसार हेतु परामर्शदाता व रिप्रोडेक्टिव हेल्थ ट्रेनर के रूप में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़ाव रहा है। वहीं लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स, इंग्लैण्ड की शोधार्थी डॉ. डेबोरा स्मिथ के शोध में वर्ष 2000 से 2002 तक शोध सहायक एवं इन्टरप्रेटर के रूप में कार्य वर्ष 2003 से 2005 तक यूनिवर्सिटी ऑफ इलनॉय, अमेरिका की शोधार्थी प्रोफेसर डॉ. कैथलिन ओ’रिली के शोध सहायक के रूप में कार्यरत रहीं हैं।
सरला देवी स्मृति सम्मान 2017- बीकानेर,‘‘काव्यश्री सम्मान-राष्ट्रीय कवि संगम, राजस्थान-2017’’,‘‘कल्याण फाऊण्डेशन ट्रस्ट द्वारा महिला दिवस 2017 पर स्त्री सशक्तिकरण सम्मान,‘‘भाईचारा फाऊण्डेशन राजस्थान’’, चन्द्रवीणा साहित्य कुंज एवं पाक्षिक समाचार’’ के राजस्थान लेखिका सम्मेलन में सम्मान 2017- कोटा,’’‘‘नगर विकास न्यास-बीकानेर द्वारा 26 जनवरी 2017 को मैथलीशरण गुप्त साहित्य पुरस्कार’’,‘‘राष्ट्रीय कवि संगम के तत्वावधान में केशरदेव गिनीया देवी बजाज चैरिटेबल ट्रस्ट (शिलॉंग) एवम् नारायणी साहित्य अकादमी (असम) द्वारा साहित्य श्री सम्मान -2016,’’‘‘राजेश बच्छ ट्रस्ट द्वारा साहित्य श्री सम्मान’ 2016,’’‘‘कल्याण फाऊण्डेशन ट्रस्ट द्वारा महिला दिवस 2016 के अवसर पर सम्मानित’’,‘‘प्रथम नवीन अलंकरण 2016 से धरणीधर रंगमंच बीकानेर में सम्मानित’’‘‘मरूधरा साहित्य परिषद हनुमानगढ का 16वां कुंवर चंद्रसिंह बिरकाळी साहित्य सम्मान 2016’’,‘‘ज़िला प्रशासन द्वारा गणतंत्र दिवस पर श्रेष्ठ शिक्षक व साहित्यक अवदान हेतु सम्मानित, ’2015 स्वाधीनता दिवस पर जिला प्रशासन बीकानेर, द्वारा साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिये सम्मानित 2014, सलिला साहित्य संस्थान सलूम्बर, द्वारा सलिला साहित्य रत्न सम्मान-2014,‘‘सम्मान-2014, ‘‘‘बीकानेर नगर स्थापना दिवस पर बीकानेर गौरव सम्मान-2013,‘‘‘‘गणतंत्र दिवस पर नगर विकास न्यास बीकानेर द्वारा ’’हथेली में चांद’’ राजस्थानी काव्य संग्रह पर ’’पीथळ पुरस्कार-2013’’ व’’नानूराम संस्कृता स्मृति साहित्य सम्मान-2012’,’ ’’नगरश्री’’ चूरू द्वारा सम्मानित 2011 आदि पुरस्कार और सम्मान की सुदीर्घ श्रृंखला आपके यशस्वी काव्य संसार के इंद्रधनुषी चितराम हैं।
धन्य है आपकी लेखनी, आपकी मेधावी वाणी और आपका विलक्षण, प्रतिभावान व्यक्तित्व! आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं तनिमा साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे!
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
संपादक -ललकार समाचार पत्र-चित्तौड़गढ़ संपादक- प्रकाशक‘तनिमा
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‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम’’ एवं एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र-उदयपुर (राजस्थान)द्वारा राजस्थान में पत्रकारिता के पुरोधा स्व. डॉ. भँवर सुराणा साहब की स्मृति में सादर...
संवेदन शील, प्रज्ञावान लेखक, निर्भीक व विरले व्यक्तित्व
अद्भुत व्यंग्यकार व लेखक सम्माननीय डॉ. देवेन्द्र ‘इन्द्रेश साहब...
‘‘के पाणि पल्लवों में सादर अर्पित ‘‘क़लम के सिपाही सम्मान’’
अभिनंदन पत्र
दिनांक-27 मई 2018, उदयपुर
उदासियों और बेबसी के तम हमें कब तक छलेंगे?
आप जब मुस्कान के बन दीप हरदम जलेंगे
हे यशस्वी क़लम साधक व अक्षय मुस्कानों के पुंज!
आज आपका यह अभिनंदन, वंदन और अर्चन व आराधना हमारे अंतस की असीम गहराई से उपजी अद्भुत भावधारा कीएक विनम्र अभिव्यक्ति है। 13 अप्रैल1947 को उझानी-बंदायूँ(उप्र) में श्रीमान की पावन कुक्षि से जन्मीं आपश्री ने पं. श्री जयगोपाल जी शर्मा के घर व मातुश्री श्रीमती भगवान देवी शर्मा की पावन कुक्षि से जन्म ले कर हिंदी भाषा और साहित्य को समृद्ध बनाने में व्यंग्य की विधा को अपनाते हुए एक सृजन सुचिंतित परिपाटी विकसित की है।
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आपश्री ने अपनी अविरल योग्यता व मेधा से एम.ए.(हिन्दी, संस्कृत) के साथ ही बी.एड. तथा ‘‘राजस्थान का हिन्दी व्यंग्य लेखन,(गद्य संदर्भ) विषय पर शोध प्रबंध’’ कर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।‘‘ जिस के आगे समय भी खींसे निंपारता हो, जिसने समय का न तन पर न मन पर हावी होने दिया हो, जिसे देख कर मुस्कुराते पुष्प भी शरमाते हों, अधखिली कलियाँ जिस पर बलिहारी हों हर दम तरोताज़ा दिखने वाले, मधुर मुस्कान के धनी, आपश्री आनंद और उत्सव के नखशिख सज्जन व साहित्यिक विभ्ूति है। एक निजी विद्यालय में अध्यापक रहते हुए, उदयपुर शहर के सर्वश्रेष्ठ व्यंग्यकार के रूप में आपकी भूमिका मुख्य रूप से एक रसिक पंडित आस्वादक की स्थापित हो गई। ज्वलंत विषयों पर आपकी रसज्ञता, विलक्षणता आपके श्रेष्ठ व्यंग्य लेखों में झलका करती है, जो अपने सुधि पाठकों और श्रोताओं के होठों की मुस्कान की इंचों का बढ़ाने के साथ ही, ह््रदय वह मस्तिष्क में भी मुस्कान के पौधे खिलाने में सक्षम तथा समर्थ है। आपश्री के व्यंग्य संकलन -‘‘निन्दक नियरे राखिए .(1991)’’,‘‘अस्पताल की टांग..(1995),’’‘‘मेरा श्रद्धांजलि समारोह (2007),’’ सद्य प्रकाशित-‘‘.लोकतंत्र में हम खरबूजे (2018) साहित्य जगत में अपनी असरदार शैली के कारण बेहद चर्चित रहे है।
आपश्री उत्तम शिक्षक, चतुर अभ्यासी, वत्सल पुरुष व्यग्ंय साहित्य के उत्तुंग शिखर हैं। एक अद्भुत विरल, श्रेष्ठ व्यक्तित्व धारक, आपश्री अपनी सहज-सरलकर्मी उदार भाषा में स्थानीय ,राष्ट्रीय व वैश्विक मुद्दों पर लेखनी चलाकर ऐसे व्यंग्य लेख लिखते रहे हैं जिन्होंने भारतीय चेतना व चिंतन को गुदगुदाते हुए निखारा भी है। समसामयिक विषयों पर लिखे गये आपके व्यंग्य लेखों में आप की भाषा सरल व व्यंजक है मगर प्रभाव इतना कि कलेजे पर असर करती है और चिंतन पर मबूर करती है। हिंदी के व्यंग्य साहित्य के इस कालखंड में आपश्री जन आकांक्षा और जन संघर्षों की प्रतिबद्धता के कीर्तिवान व्यंग्यकार के रूप में स्थापित हैं। आप का साहित्यिक जीवन जनपक्षधरता की एक उज्जवल मिसाल हैं। आपके व्यंग्य लेखन में जहाँ सामाजिक, राजनीतिक व नैतिक विडंबनाओं पर एक कुठाराघात है वही प्रयोगवादी अर्थों में आपश्री के मुक्त हस्त से लिखें व्यंय लेख समाजव देश में नवीन चिंतन व सोच को नवीन दिशा देने में समर्थ है आपकी विचार दृष्टि भारतीय साहित्य के समग्र संदर्भ से जुड़ी हुई है।
आपश्री की सन् 1970 से देश की सभी पत्र,पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित रचनाओं में रोम-रोम से जीवित साहित्यप्रेमी आम आदमी की आकांक्षाएँ हिलोरे लेती है आपश्री की रस रूचि, तुलनात्मक, आलोचनात्मक ,सुखापेक्षी मनोवैज्ञानिक रचना कौशल से परिपूर्ण आपकी लेखनी के कारण अनेक वर्षों से लगातार आकाशवाणी से व्यंग्य विनोद वार्ताएं प्रसारित होती रहतीं हैं। धन्य है आपश्री की कि साहित्य सेवी व साहित्य साधिका अर्द्धांगिनी श्रीमती ज्योत्सना इन्द्रेश ंजी भी, जो कि आपश्री की सही अर्थों में अर्धांगिनी है और आपका साथ एक मणिकांचन संयोग को दर्शाता है। आपश्री के उत्कृष्ठ रचना कौशल हेतु आपश्री को देश के अनेक प्रान्तो से ‘‘विश्व हिन्दी सम्मेलन का हिन्दी सेवी सम्मान’’, ’’लायन्स सृजन सम्मान,’’’युगधारा साहित्य रत्न सम्मान’’, कला श्रृंखला-साहित्य शिरोमणि सम्मान प्राप्त हुए हैं। सम्मान व पुरस्कारों की सुदीर्घ श्रृंखला आपके यशस्वी रचना संसार के इंद्रधनुषी चितराम हैं।
आज हृदय के कोटि-कोटि एवं राशि-राशि उल्लास से आपको यह अभिनंदन पत्र सादर समर्पित करते हुए ‘‘राजस्थान मीडिया एक्शन फॉरम’’ एवं ‘‘तनिमा’’ साहित्यिक मासिक पत्र परिवार’’ अन्तर में असीम गौरव और हर्ष का अनुभव कर रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह असीम वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको एक सुमंगल जीवन पथ पर गतिमान रखे।
अर्चन और अभिनंदन हो, जगभर कीर्ति कीर्तन हो,
दिशा दिशा में आपका चर्चा, आराधन और वंदन हो
आपका अभिनन्दन-हमारा सौभाग्य
अनिल सक्सेना डॉ .शकुंतला सरूपरिया
अघ्यक्ष- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम महासचिव- राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम
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