मां की वदना

शब्द सुर की थाली लेकर गाऊं मैया वंदना।

रोशनी के दीप चरणों में बिछाऊं मां आंगना 

रूप और सिंगार संग तेरा, नव सजा दरबार मां,

हस्त खप्पर और त्रिशूल हैं,सिंह पर असवार मां

लाल चुनर सोहवे सिंदूर, बाजे खन खन कंगना


तेरे चरणों में सुख की गंगा,  ममता मां तू लुटाती है

भक्तों की इक ही पुकार पर , मां तू दौड़ी आती है

भाव अंतस लदा

तेरी कृपा के झूले झुलूं, शरणों में रखना सदा

 मां जीवन की देहरी सूनी, सुख की  बन्दनवारें टांगना।


नौं नौं रूप  दर्शाना मैया  फिर से इस नवरात में, 

मंत्र उच्चारित करें, सब आरती करें साथ में, 

तेरे हाथों में दात्त्री लालिमा, वर मां भक्तों पे वारना


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